“मुक्तक” फिंगरटच ने कर दिया, दिन जीवन आसान।

31 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (111 बार पढ़ा जा चुका है)

“मुक्तक”


फिंगरटच ने कर दिया, दिन जीवन आसान।

मोबाइल के स्क्रीन पर, दिखता सकल जहान।

बिना रुकावट मान लो, खुल जाते हैं द्वार-

चाहा अनचाहा सुलभ, लिखो नाम अंजान॥-1


बिकता है सब कुछ यहाँ, पर न मिले ईमान।

हीरा पन्ना अरु कनक, खूब बिके इंसान।

बिन बाधा बाजार में, बे-शर्ती उपहार-

हरि प्रणाम मुस्कान सुख, सबसे बिन पहचान॥-2


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "दोहा"इंसानों के महल में पलती ललक अनेक।



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
27 अगस्त 2018
छन्द- वाचिकप्रमाणिका (मापनीयुक्त मात्रिक) वर्णिक मापनी - 12 12 12 12 अथवा - लगा लगा लगालगा, पारंपरिक सूत्र - जभान राजभा लगा (अर्थात जर ल गा) विशेष : प्रमाणिका 'मापनीयुक्त वर्णिक छंद' है,जिसमें वर्णों की संख्यानिश्चित होती है अर्थात किसी गुरु 2 के स्थान पर दो लघु 11 प्रयोग करने की छूटनहीं होती है। ऐस
27 अगस्त 2018
04 सितम्बर 2018
"
वज़्न- 1222 12222122 2, काफ़िया-आ, रदीफ़ - " करते हैं इशारोमें""गज़ल"चलो जी कुछ ख़ताकरते हैं इशारों मेंबवंडर ही खड़ा करतेहै इशारों मेंकहाँ तक चल सकेंगेदिनमान चुप होकरजलाते है अगन दीयाहै इशारों में।।नयी जब रोशनी होगीतम फ़ना होगाउड़ाते हैं वोफतिंगा हैं इशारों में।।भरा पानी शहर मेंले आग मत जानाबुझे मन का ठिकान
04 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
"
मापनी - 22 22 2222"गीत"कितना सुंदर मौसमआया साथी तेरा साथसुहायापकड़ चली हूँ तेरीबाहेंआँचल मेरा नभलहराया।।रहना हरदम साथ हमारेशीतल है कितनी यहछाया।।नाहक उड़ते विहगअकेलेमैंने भी मन कोसमझाया।।दूर रही अबतक छविमेरीआज उसे फिर वापसपाया।।चँहक रही हूँ खेलरही हूँसाजन तूने मनहरषाया।।गौतम तेरा बाग खिलाहैभौंरा सावन
27 अगस्त 2018
23 अगस्त 2018
"हाइकु"मेरे आँगनगीत गाती सखियाँ तुलसी व्याह।।-१कार्तिक माहभर मांग सिंदूरतुलसी पूजा।।-२तुलसी दलघर-घर मंगलसु- आमंत्रण।।-३तुलसी चौरा रोग विनाशकदीप प्रकाश।।-४तुलसी पत्तासाधक सुखवंतादिव्य औषधि।।-५महातम मिश्र गौतम गोराखपुरी
23 अगस्त 2018
28 अगस्त 2018
पदांत- नहीं, समांत-अहरी,मापनी-2122 2122 2122 12“गीतिका” आप के दरबार में आशांति ठहरी नहीं दिख रहा है ढंग कापल प्रखर प्रहरी नहींझूलती हैं देख कैसेद्वार तेरे मकड़ियाँ रोशनी आने न देतीझिल्लियाँ गहरी नहीं॥ वो रहा फ़ानूष लटकाझूलता बे-बंद का लग रहा शृंगार सेभी रेशमा लहरी नहीं॥गुंबजों का रंगउतरा जा रहा बरसात
28 अगस्त 2018
04 सितम्बर 2018
छंद - हरिगीतिका(मात्रिक) मुक्तक, मापनी- 2212 2212 2212 2212“मुक्तक” (छंद -हरिगीतिका)फैले हुए आकाश मेंछाई हुई है बादरी। कुछ भी नजर आतानहीं गाती अनारी साँवरी। क्यों छुप गई है ओटलेकर आज तू अपने महल- अब क्या हुआ का-जलबिना किसकी चली है नाव री॥-1क्यों उठ रही हैरूप लेकर आज मन में भाँवरी। क्यों डूबने कोहरघड़
04 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
छंद - हरिगीतिका(मात्रिक) मुक्तक, मापनी- 2212 2212 2212 2212“मुक्तक” (छंद -हरिगीतिका)फैले हुए आकाश मेंछाई हुई है बादरी। कुछ भी नजर आतानहीं गाती अनारी साँवरी। क्यों छुप गई है ओटलेकर आज तू अपने महल- अब क्या हुआ का-जलबिना किसकी चली है नाव री॥-1क्यों उठ रही हैरूप लेकर आज मन में भाँवरी। क्यों डूबने कोहरघड़
04 सितम्बर 2018
20 अगस्त 2018
"दोहा"इंसानों के महल में पलती ललक अनेक।खिले जहाँ इंसानियत उगता वहीँ विवेक।।जैसी मन की भावना वैसा उभरा चित्र।सुंदर छाया दे गया खिला साहसी मित्र।।अटल दिखी इंसानियत सुंदर मन व्यवहार।जीत लिया कवि ने जगत श्रद्धा सुमन अपार।।महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
20 अगस्त 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x