“मुक्तक” फिंगरटच ने कर दिया, दिन जीवन आसान।

31 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (57 बार पढ़ा जा चुका है)

“मुक्तक”


फिंगरटच ने कर दिया, दिन जीवन आसान।

मोबाइल के स्क्रीन पर, दिखता सकल जहान।

बिना रुकावट मान लो, खुल जाते हैं द्वार-

चाहा अनचाहा सुलभ, लिखो नाम अंजान॥-1


बिकता है सब कुछ यहाँ, पर न मिले ईमान।

हीरा पन्ना अरु कनक, खूब बिके इंसान।

बिन बाधा बाजार में, बे-शर्ती उपहार-

हरि प्रणाम मुस्कान सुख, सबसे बिन पहचान॥-2


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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