“छन्द मुक्त काव्य” “शहादत की जयकार हो”

05 सितम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (108 बार पढ़ा जा चुका है)

“छन्द मुक्त काव्य”


“शहादत की जयकार हो”

जब युद्ध की टंकार हो

सीमा पर हुंकार हो

माँ मत गिराना आँख आँसू

माँ मत दुखाना दिल हुलासू

जब रणभेरी की पुकार हो

शहादत की जयकार हो।।


जब गोलियों की बौछार हो

जब सीमा पर त्यौहार हो

माँ भेज देना बहन की राखी

अपने सीने की बैसाखी

वीरों की कलाई गुलजार हो

शहादत की जयकार हो॥


जब चलना दुश्वार हो

वर्फ की ठंडी बौंछार हो

माँ भेजना आँचल की गर्मी

देश की हलचल व मर्मी

तेरा लालन खुद्दार हो

शहादत की जयकार हो!

शहादत की जयकार हो!

शहादत की जयकार हो!


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "गज़ल" चलो जी कुछ ख़ता करते हैं इशारों में



रेणु
06 सितम्बर 2018

इस सुंदर लेख को आज का लेख के रूप में चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई |

रेणु
06 सितम्बर 2018

इस सुंदर लेख को आज का लेख के रूप में चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई |

महातम मिश्रा
07 सितम्बर 2018

हार्दिक धन्यवाद बहन, स्वागतम

रेणु
06 सितम्बर 2018

माँ भेजना आँचल की गर्मी
देश की हलचल व मर्मी
तेरा लालन खुद्दार हो
शहादत की जयकार हो!!!!!!!
आदरनीय भैया --- आज आपने जो लिखा उसका कोई सानी नहीं | एक वीररस से भरपूर ओजमयी रचना !!!!!! कहा गयाहै धन्य है वो कलम जो वीरों के गौरव गान लिखती है और उनका यशोगान गा ,समाज को उनके बलिदान से परिचित करवाती है |
शहादत की जय - जय कार हो -
ना वीरों का तिरस्कार हो -
जिन्होंने राष्ट्र को अपने लहू से सींचा
उस ऋण का कैसे उतार हो !!!!!!!!!
भइया हार्दिक बधाई इस सुंदर और गर्व का अनुभव कराती रचना के लिए | सादर प्रणाम |

महातम मिश्रा
07 सितम्बर 2018

बहुत बहुत शुभाशीष प्रिय बहन रेणु, वीरों से ही धरा पावन है, प्रतिफल उन्हें नमन, जय हिन्द, कैसी हैं आप और बच्चे, आप का दिन मंगलमय हो!

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
30 अगस्त 2018
“कुंडलिया” मोहित कर लेता कमल, जल के ऊपर फूल। भीतर डूबी नाल है, हरा पान अनुकूल॥ हरा पान अनुकूल, मूल कीचड़ सुख लेता। खिल जाता दु:ख भूल, तूल कब रंग चहेता॥ कह गौतम कविराय, दंभ मत करना रोहित। हँसता खिलकर खूब, कमल करता मन मोहित॥महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
30 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
छन्द- वाचिकप्रमाणिका (मापनीयुक्त मात्रिक) वर्णिक मापनी - 12 12 12 12 अथवा - लगा लगा लगालगा, पारंपरिक सूत्र - जभान राजभा लगा (अर्थात जर ल गा) विशेष : प्रमाणिका 'मापनीयुक्त वर्णिक छंद' है,जिसमें वर्णों की संख्यानिश्चित होती है अर्थात किसी गुरु 2 के स्थान पर दो लघु 11 प्रयोग करने की छूटनहीं होती है। ऐस
27 अगस्त 2018
24 अगस्त 2018
“मुक्तक”मापनी- २१२२ २१२२ २२१२ २१२जिंदगी को बिन बताए कैसे मचल जाऊँगा। बंद हैं कमरे खुले बिन कैसे निकल जाऊँगा। द्वार के बाहर तेरे कोई हाथ भी दिखता नहीं- खोल दे आकर किवाड़ी कैसे फिसल जाऊँगा॥-१ मापनी- २२१२ २२१२ २२१२ २२१२जाना कहाँ रहना कहाँ कोई किता चलता नहीं। यह बाढ़ कैसी आ गई
24 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
"
मापनी - 22 22 2222"गीत"कितना सुंदर मौसमआया साथी तेरा साथसुहायापकड़ चली हूँ तेरीबाहेंआँचल मेरा नभलहराया।।रहना हरदम साथ हमारेशीतल है कितनी यहछाया।।नाहक उड़ते विहगअकेलेमैंने भी मन कोसमझाया।।दूर रही अबतक छविमेरीआज उसे फिर वापसपाया।।चँहक रही हूँ खेलरही हूँसाजन तूने मनहरषाया।।गौतम तेरा बाग खिलाहैभौंरा सावन
27 अगस्त 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x