“छन्द मुक्त काव्य” “शहादत की जयकार हो”

05 सितम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (109 बार पढ़ा जा चुका है)

“छन्द मुक्त काव्य”


“शहादत की जयकार हो”

जब युद्ध की टंकार हो

सीमा पर हुंकार हो

माँ मत गिराना आँख आँसू

माँ मत दुखाना दिल हुलासू

जब रणभेरी की पुकार हो

शहादत की जयकार हो।।


जब गोलियों की बौछार हो

जब सीमा पर त्यौहार हो

माँ भेज देना बहन की राखी

अपने सीने की बैसाखी

वीरों की कलाई गुलजार हो

शहादत की जयकार हो॥


जब चलना दुश्वार हो

वर्फ की ठंडी बौंछार हो

माँ भेजना आँचल की गर्मी

देश की हलचल व मर्मी

तेरा लालन खुद्दार हो

शहादत की जयकार हो!

शहादत की जयकार हो!

शहादत की जयकार हो!


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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रेणु
06 सितम्बर 2018

इस सुंदर लेख को आज का लेख के रूप में चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई |

रेणु
06 सितम्बर 2018

इस सुंदर लेख को आज का लेख के रूप में चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई |

महातम मिश्रा
07 सितम्बर 2018

हार्दिक धन्यवाद बहन, स्वागतम

रेणु
06 सितम्बर 2018

माँ भेजना आँचल की गर्मी
देश की हलचल व मर्मी
तेरा लालन खुद्दार हो
शहादत की जयकार हो!!!!!!!
आदरनीय भैया --- आज आपने जो लिखा उसका कोई सानी नहीं | एक वीररस से भरपूर ओजमयी रचना !!!!!! कहा गयाहै धन्य है वो कलम जो वीरों के गौरव गान लिखती है और उनका यशोगान गा ,समाज को उनके बलिदान से परिचित करवाती है |
शहादत की जय - जय कार हो -
ना वीरों का तिरस्कार हो -
जिन्होंने राष्ट्र को अपने लहू से सींचा
उस ऋण का कैसे उतार हो !!!!!!!!!
भइया हार्दिक बधाई इस सुंदर और गर्व का अनुभव कराती रचना के लिए | सादर प्रणाम |

महातम मिश्रा
07 सितम्बर 2018

बहुत बहुत शुभाशीष प्रिय बहन रेणु, वीरों से ही धरा पावन है, प्रतिफल उन्हें नमन, जय हिन्द, कैसी हैं आप और बच्चे, आप का दिन मंगलमय हो!

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