“कुंडलिया” पढ़ना- लिखना, बोलना, विनय सिखाते आप।

05 सितम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (107 बार पढ़ा जा चुका है)

“कुंडलिया”   पढ़ना- लिखना, बोलना, विनय सिखाते आप।

शिक्षक दिवस, 05-09-2018 के ज्ञान शिरोमणि अवसर पर सर्व गुरुजनों को सादर नमन, वंदन व अभिनंदन


कुंडलिया”


पढ़ना- लिखना, बोलना, विनय सिखाते आप।

हर अबोध के सारथी, वीणा के पदचाप॥

वीणा के पदचाप, आप शिक्षक गुरु ज्ञानी।

खड़ा किए संसार, बनाकर के विज्ञानी॥

कह गौतम कविराय, सिखाते पथपर बढ़ना।

सृजन रंग परिधान, सु-सृष्टि सभ्यता पढ़ना॥


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "गज़ल" चलो जी कुछ ख़ता करते हैं इशारों में



रेणु
06 सितम्बर 2018

क्या बात है आदरणीय भैया !!!!!!!! पावन गुरु शक्ति को समर्पित बहुत ही श्रद्धा भरे भाव !!! सचमुच गुरुजनों से पूजनीय कोई नहीं | उनके चरणों में कोटि - कोटि नमन !! और आपको बधाई भावपूर्ण रचना के लिए | सादर नमन

महातम मिश्रा
07 सितम्बर 2018

हृदयतल से धन्यवाद बहन, सदैव हर्षित रहो

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
04 सितम्बर 2018
“भोजपुरी गीत”कइसे जईबू गोरीछलकत गगरिया, डगरिया में शोर हो गइलकहीं बैठल होइहेंछुपि के साँवरिया, नजरिया में चोर हो गइल...... बरसी गजरा तुहार, भीगी अँचरा लिलार मति कर मन शृंगार, रार कजरा के धारपायल खनकी तेहोइहें गुलजार गोरिया मनन कर घर बार, जनि कर तूँ विहार,कइसे विसरी धनापलखत पहरिया, शहरिया अंजोर हो गइ
04 सितम्बर 2018
21 अगस्त 2018
काफ़िया- आ स्वर रदीफ़- रह गया वज्न- २१२ २१२ २१२ २१२ फाइलुन फाइलुन फाइलुन फाइलुन"गज़ल"आदमी भल फरज मापता रह गयाले उधारी करज छाँकता रहा गयाखोद गड्ढा बनी भीत उसकी कभीजिंदगी भर उसे पाटता रह गया।।दूर होते गए आ सवालों में सभीहल पजल क्या हुई सोचता रह गया।।उमर भर की जहमद मिली मुफ्त
21 अगस्त 2018
28 अगस्त 2018
पदांत- नहीं, समांत-अहरी,मापनी-2122 2122 2122 12“गीतिका” आप के दरबार में आशांति ठहरी नहीं दिख रहा है ढंग कापल प्रखर प्रहरी नहींझूलती हैं देख कैसेद्वार तेरे मकड़ियाँ रोशनी आने न देतीझिल्लियाँ गहरी नहीं॥ वो रहा फ़ानूष लटकाझूलता बे-बंद का लग रहा शृंगार सेभी रेशमा लहरी नहीं॥गुंबजों का रंगउतरा जा रहा बरसात
28 अगस्त 2018
07 सितम्बर 2018
शीर्षक ---भाषा/बोली/वाणी/इत्यादि समानार्थक“मुक्तक”तुझे छोड़ न जाऊँ रीसैयां न कर लफड़ा डोली में। क्या रखा है इसझोली में जो नहीं तेरी ठिठोली में। आज के दिन तूँ रोकले आँसू नैन छुपा ले नैनों से-दिल ही दिल की भाषाजाने क्या रखा है बोली में॥-1 हंस भी मोती खाएगा, फिर एक दिन ऐसा आयेगा। कागा अपने रंग मेंआकर,
07 सितम्बर 2018
06 सितम्बर 2018
“कुंडलिया”आती पेन्सल हाथ जब, बनते चित्र अनेक। रंग-विरंगी छवि लिए, बच्चे दिल के नेक॥ बच्चे दिल के नेक, प्रत्येक रेखा कुछ कहती। हर रंगों से प्यार, जताकर गंगा बहती॥ कह गौतम हरसाय, सत्य कवि रचना गाती। गुरु शिक्षक अनमोल, भाव शिक्षा ले आती॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
06 सितम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x