अंतर इच्छा

07 सितम्बर 2018   |  विवेक शुक्ला   (64 बार पढ़ा जा चुका है)

लेने को तो मैं ले लेता, बदला बदलने वालों से l

फिर सोचा क्यों उनको सोचूँ , जिनको मेरी परवाह नहीं थी ll

करने को तो मैं कर देता, विद्रोह सभी खिलौनों से l

पर बचपन को सूना कर दूँ , ऐसी कोई चाह नहीं थी ll

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