गीत सुनो

19 सितम्बर 2018   |  sweta sinha   (83 बार पढ़ा जा चुका है)

गीत सुनो  - शब्द (shabd.in)

दुःख,व्यथा,क्षोभ ही नहीं भरा बस विरह, क्रोध ही नहीं धरा मकरंद मधुर उर भीत सुनो जीवन का छम-छम गीत सुनो ज्वाला में जल मिट जाओगे गत मरीचिका आज लुटाओगे बनकर मधुप चख लो पराग कुछ क्षण का सुरभित रंग-राग अंबर से झरता स्नेहप्रीत सुनो कल-कल प्रकृति का गीत सुनो क्यूँ उर इतना अवसाद भरा? क्यूँ तम का गहरा गाद भरा? लाली उषा की,पवन का शोर छलके स्वप्न दृग अंजन कोर घन घूँघट चाँदनी शीत सुनो टिम-टिम तारों का गीत सुनो इस सुंदर जीवन से विरक्ति क्यों? कड़वी इतनी अभिव्यक्ति क्यों? मन अवगुंठन,हिय पट खोलो तुम खग,तितली,भँवर संग बोलो तुम न मुरझाओ, मनवीणा मनमीत सुनो प्रेमिल रून-झुन इक गीत सुनो --श्वेता सिन्हा

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रेणु
20 सितम्बर 2018

प्रिय श्वेता -- बहुत ही सुंदर सरस गीत और कोमल शब्दावली -- मन्त्र मुग्ध हो पढती गयी जितनी सराहना करूं कम है -कितने प्यारे हैं सभी बोल --
मन अवगुंठन,
हिय पट खोलो तुम खग
,तितली,भँवर संग बोलो तुम न मुरझाओ,
मनवीणा मनमीत सुनो
प्रेमिल रून-झुन इक गीत सुनो !!!!!!! -
माँ सरस्वती इस लेखनी को सदा अपना आशीष दे | सस्नेह --

sweta sinha
22 सितम्बर 2018

सादर आभार मेरी प्यारी दी दी आपका आशीष सदैव मेरी लेखनी की प्रेरणा बनते है । दी नेह बना रहे। हृदय तल से बेहद शुक्रिया आपका दी।

अमित
20 सितम्बर 2018

घन घूँघट चाँदनी शीत सुनो टिम-टिम तारों का गीत सुनो इस सुंदर जीवन से विरक्ति क्यों? कड़वी इतनी अभिव्यक्ति क्यों? बेहद ख़ूबसूरत गीत, मैम
उत्तम शब्द चयन और नायाब अभिव्यक्ति... वाह👌👌👌👏👏👏

sweta sinha
22 सितम्बर 2018

आपका हृदयतल से बेहद आभार अमित जी। इतना उत्साह वर्धन सच में किसी भी रचनाकार की कलम के लिए संजीवनी से कम नहीआपका जितना भी आभार कहे हम कम है। बेहद शुक्रिया

अमित
20 सितम्बर 2018

घन घूँघट चाँदनी शीत सुनो टिम-टिम तारों का गीत सुनो इस सुंदर जीवन से विरक्ति क्यों? कड़वी इतनी अभिव्यक्ति क्यों? बेहद ख़ूबसूरत गीत, मैम
उत्तम शब्द चयन और नायाब अभिव्यक्ति... वाह👌👌👌👏👏👏

अमित
20 सितम्बर 2018

घन घूँघट चाँदनी शीत सुनो टिम-टिम तारों का गीत सुनो इस सुंदर जीवन से विरक्ति क्यों? कड़वी इतनी अभिव्यक्ति क्यों? बेहद ख़ूबसूरत गीत, मैम

अमित
20 सितम्बर 2018

घन घूँघट चाँदनी शीत सुनो टिम-टिम तारों का गीत सुनो इस सुंदर जीवन से विरक्ति क्यों? कड़वी इतनी अभिव्यक्ति क्यों?

अलोक सिन्हा
20 सितम्बर 2018

अच्छी रचना है |

sweta sinha
22 सितम्बर 2018

सादर आभार आलोक जी। हृदययल से बेहद शुक्रिया आपका।

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27 सितम्बर 2018
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27 सितम्बर 2018

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