खफा

20 सितम्बर 2018   |  नीरज चंदेल   (53 बार पढ़ा जा चुका है)

वक्त से आज अभी मुलाकात हुई मेरी,

कहने लगा, देरी से बहुत खफा हूँ तेरी.

जो जब करना था तब तूने नहीं किया,

सुधर जा,गलतियां हो चुकी है बहुतेरी.

जाग जा आलस को कह कि भाग जा,

मेहनत से किस्मत चमक जाएगी तेरी.

रुकना नहीं अब झुकना भी नहीं कहीं ,

तभी तो होगी मंजिल से पहचान तेरी.

कुछ नया कर बातें दिल की बयां कर,

साथ चल दोस्ती होगी गहरी तेरी मेरी.

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रेणु
21 सितम्बर 2018

प्रिय नीरज जी - बहुत अच्छा लिखा आपने | शुभ कामनाएं |

नीरज चंदेल
22 सितम्बर 2018

धन्यवाद रेणु जी .

अलोक सिन्हा
21 सितम्बर 2018

चंदेल जी ! बहुत अच्छी पंक्तियाँ है | शुभ कामनाएं |

नीरज चंदेल
22 सितम्बर 2018

धन्यवाद अलोक जी

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