तृष्णा मन की -

23 सितम्बर 2018   |  रेणु   (57 बार पढ़ा जा चुका है)

तृष्णा मन की -  - शब्द (shabd.in)

मिले जब तुम अनायास -

मन मुग्ध हुआ तुम्हे पाकर ;

जाने थी कौन तृष्णा मन की -

जो छलक गयी अश्रु बनकर ?


हरेक से मुंह मोड़ चला -

मन तुम्हारी ही ओर चला

अनगिन छवियों में उलझा -

तकता हो भावविभोर चला-

जगी भीतर अभिलाष नई-

चली ले उमंगों की नयी डगर ! !


प्राण स्पंदन हुए कम्पित,

जब सुने स्वर तुम्हारे सुपरिचित ;

जाने ये भ्रम था या तुम वो ही थे-

सदियों से थे जिसके प्रतीक्षित;

कर गये शीतल- दिग्दिगंत गूंजे-

तुम्हारे ही वंशी- स्वर मधुर !!


डोरहीन ये बंधन कैसा ?

यूँ अनुबंधहीन विश्वास कहाँ ?

पास नही पर प्याप्त मुझमें

ऐसा जीवन - उल्लास कहाँ ?

कोई गीत कहाँ मैं रच पाती ?

तुम्हारी रचना ये शब्द प्रखर !!


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अगला लेख: नेह तुलिका --



कामिनी सिन्हा
19 अक्तूबर 2018

आप तो सर्वगुण सम्पूर्ण है रेणु ,मेरे पास शब्द नहीं है कैसे तारीफ करू ,भाव बिभोर हो गई हूँ , बस ढेर सारा प्यार

रेणु
19 अक्तूबर 2018

प्रिय कामिनी -- आपका अप्रितम स्नेह है जो मेरे लेखन को इतना महत्व दिया | आभार सखी |

प्रेम की अति सुंदर अभिव्यक्ति

रेणु
18 अक्तूबर 2018

आदरणीय अजय जी सादर आभार रचना को पसंद करने के लिए |

प्रेम की अति सुंदर अभिव्यक्ति

शोभा भारद्वाज
07 अक्तूबर 2018

प्रिय रेणू जी अति सुंदर रचना डोरहीन ये बंधन कैसा ?

यूँ अनुबंधहीन विश्वास कहाँ ?

पास नही पर प्याप्त मुझमें

ऐसा जीवन - उल्लास कहाँ ?

रेणु
07 अक्तूबर 2018

आदरणीय शोभा जी -- सादर आभार - जो अपने मेरी रचना पढ़ी | आपके शब्द अनमोल हैं मेरे लिए !!!!!!! नमन --

शोभा भारद्वाज
06 अक्तूबर 2018

अति सुंदर भाव

sweta
24 सितम्बर 2018

दी,आपकी मन से निसृत अभिव्यक्ति मन तक पहुँच रही है।
अलौकिक प्रेम के भावों में गूँथी शब्दों की माला बेहद अद्भुत है दी।
बधाई और हार्दिक शुभच्छायें स्वीकारें ।

sweta
24 सितम्बर 2018

दी,आपकी मन से निसृत अभिव्यक्ति मन तक पहुँच रही है।
अलौकिक प्रेम के भावों में गूँथी शब्दों की माला बेहद अद्भुत है दी।
बधाई और हार्दिक शुभच्छायें स्वीकारें ।

sweta
24 सितम्बर 2018

दी,आपकी मन से निसृत अभिव्यक्ति मन तक पहुँच रही है।
अलौकिक प्रेम के भावों में गूँथी शब्दों की माला बेहद अद्भुत है दी।
बधाई और हार्दिक शुभच्छायें स्वीकारें ।

sweta
24 सितम्बर 2018

दी,आपकी मन से निसृत अभिव्यक्ति मन तक पहुँच रही है।
अलौकिक प्रेम के भावों में गूँथी शब्दों की माला बेहद अद्भुत है दी।
बधाई और हार्दिक शुभच्छायें स्वीकारें ।

रेणु
25 सितम्बर 2018

प्रिय श्वेता -- सबसे पहले मेरे पेज पर हार्दिक स्वागत है आपका | मेरी रचना से कहीं अनमोल हैं आपके ये स्नेह भरे उदगार | मेरा प्यार बस |

अलोक सिन्हा
23 सितम्बर 2018

बहुत ही सुंदर , सुगठित व् मधुर रचना है |

रेणु
25 सितम्बर 2018

आदरणीय आलोक जी आपको पसंद आई तो रचना सार्थक हुई | सादर आभार और नमन |

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