आओ अब कुछ बात करे

27 सितम्बर 2018   |  महेश कुमार बोस   (85 बार पढ़ा जा चुका है)

आओ अब कुछ बात करे

आओ अब कुछ बात करे,

कदम कुछ अब साथ भरे।

भुला के सारे गिले शिकवे,

नये रिश्ते की शुरुआत करे।

पहले ही बहुत कम है जिंदगी,

फिर रुठ के क्यो वक्त बरबाद करे।

बंजर हो गया था जो पतझड़ के आने से,

उस गुलशन को प्यार से फिर आबाद करे।

भुल गया हूं मै तुम भी भुला दो,

बीती जिंदगी को क्यों हम याद करे।

आओ अब कुछ बात करे,

कदम अब कुछ साथ भरे।

भुला के सारे गिले शिकवे,

नये रिश्ते की शुरुआत करे।

आओ अब कुछ बात करे…………………

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अलोक सिन्हा
30 सितम्बर 2018

अ च्छी रचना है |

महेश कुमार बोस
01 अक्तूबर 2018

धन्यवाद श्रीमान

Nasrin
27 सितम्बर 2018

bhut achi lekhni thi really meri life pr bilkul fit bethti h

महेश कुमार बोस
01 अक्तूबर 2018

धन्यवाद

Nasrin
27 सितम्बर 2018

bhut achi lekhni thi really meri life pr bilkul fit bethti h

Nasrin
27 सितम्बर 2018

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Nasrin
27 सितम्बर 2018

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Nasrin
27 सितम्बर 2018

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Nasrin
27 सितम्बर 2018

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Nasrin
27 सितम्बर 2018

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Nasrin
27 सितम्बर 2018

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