शक़्कर

04 अक्तूबर 2018   |  eklavya   (29 बार पढ़ा जा चुका है)

एक रात दरवाजे पे देर रात कुछ आहट सी सुनाई दी ,बाहर जाकर देखा तो मोह्हबत खड़ी थी ।

मैंने घड़ी मैं देखा 3 बज रहे थे और उसने खामोशियाँ के करवा को तोड़ते हुए बोला चीनी है

मुझे भी ना जाने उस पल क्या हुआ ना जाने कहा से हिम्मत आयी और जबान से निकल गया चलो साथ पीते है

उसके चेहरे पे जिजक थी पहले

शायद लेकिम बरसो गुजरे प्यार की कुछ अहसास अभी भी उसके सीने मैं कैद थे शायद और वो भी खुद को रोक ना पायी

वक़्त बीत रहा था हमारी आंखे बोलते बोलते थक गई थी और उसने भी हमारे बीच मै फेल रहे एक अंजानेपन के बांध को तोड़ते हुये पूछा क्या तुम्हें याद है

उसका बस इतना कहना ही था कि मेरे अल्फाजो पे लगी बेड़िया टूट सी गयी और यादो की वो तस्वीरे जो दिल मे कही बंद दरवाजो मैं दबी थी वो सामने आ गयी और मैंने भी कहा हाँ

और भूलता भी तोह कैसे

उस दिन उसे पहली बार तो देखा था यू तो पढ़ाई मैं अव्वल था मैं पर मेरा दिल पहली बार धड़कना भूल गया था वक़्त रुक सा गया था और हां उस वक़्त मुझे एहसास हुआ इश्क़ क्या होता था

बड़ी शिद्दत से कोशिश की मैंनेउसको जानने की ,पहचाने की और एक दिन मेरे पे खुदा की रहमत हुए यारो उसदिन इश्क़ मैं बरकत हुई

मैं चाय पी रहा था कि एक अजनबी से आवाज आई जो मेरे दिल के बहुत करीब थी और मुझसे पूछा क्या आप मुझे घर तक lift देंगे ।यू तोह आज तक किसी को मैंने पीछे नही बिठाया था मगर किसी की क़ुर्ब्ते को लिए दिल इतना भी न तड़पाया था उस दिन से शुरू मेरी मोह्हबत का सफर अब तक न रुका,,,उसको भी दोस्ती कब प्यार मैं बदल गयी पता ही न पड़ा ।

हमारा छोटा से जहाँ बड़ा खुशहाल था की ऐसा लग रहा था वो मेरा अंतिम प्यार था एक रोज मुझे जॉब का ऑफ़व्र आयाऔर ना चाहते हुये भी मुझे उससे दूर जाना पड़ा

पर सच्ची मोह्हबत कहा घुटने टेकती है साहब

कब ये इश्क़ अकीदत बन गया पता ही न चला

कुरबतो को तरसते तरसते एक रोज आयी वो मेरे शहर मे मुझसे मिलने

उसने कॉल भी किया मयू तो हर पल मैं उसकी कॉल का इतज़ार करता रहता था मगर इस रोज कमबख्त वो मुझे सुनाई ना दी

बातो की एक्सप्रेस ट्रेन चल ही रही थी कि

उसने आवाज दी शक्कर 2 चमच्च मैंने ढाल कर महसूस कोई आवाज ना आई

मुड़के देखा था कोई नही था अपने आप को मैन संभाला और खुद को याद दिलाया

मेरे ख्वाबो की शहजादी अब इस दुनिया मे नही बस्ती है ,पर मेरी रातो को जुगनू बनके रोशन जरूर करती है

उस दिन शायद वो कॉल उठा लेता

तो शायद उसे उन सफेद कपडोमे न लिपटा देखा होता

हमारी इश्क़ की गाड़ी को किसी ने टक्कर मार दी थी

और मेरा दिल उस हादसे मैं बिखर गया था

पर आज भी वो मेरा ध्यान बड़े प्यार से रखती है

हर रोज मेरी चाय मैं अपनी मोह्हबत की शक्कर जरूर मिला देती है।


अगला लेख: हाँ मत करो बात मुझसे



कामिनी सिन्हा
08 अक्तूबर 2018

बहुत खूब,दो पक्तियो में ही सारी कहानी कह दी आप ने .

रेणु
06 अक्तूबर 2018

क्या बात है !! बहुत ही प्रतीकात्मक रचना !!!!!

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