"छंद मुक्तक"

21 अक्तूबर 2018   |  महातम मिश्रा   (92 बार पढ़ा जा चुका है)

छंद- कीर्ति (वर्णिक) छंद विधान - स स स ग मापनी- 112 112 112 2

"आप सभी महानुभावों को पावन विजयादशमी की हार्दिक बधाई"


"मुक्तक"


मुरली बजती मधुमाषा

हरि को भजती अभिलाषा

रचती कविता अनुराधा

छलकें गगरी परिहाषा।।-1


घर में छलिया घुस आया

यशुदा ममता भरमाया

गलियाँ खुश हैं गिरधारी

बजती मुरली सुख छाया।।-2


मथुरा जनमे वनवारी

यमुना छलके हितकारी

वसुदेव न जानत माया

पग छूकर के परवारी।।-3


सुख नीद यशोमति प्यारी

नहिं जान सकी शिशु नारी

शुभ भोर भई रनिवाशा

बदला बदली गति न्यारी।।-4


ममता पहचान विसारी

मनमोहन की बलिहारी

जनमे ललना गुणशाली

जय हो जय हो गिरधारी।।-5


घर में प्रसरी किलकारी

खिलती सुख की फुलवारी

ख़ुशियाँ दहरी दरवाजा

सुखपान करे नर - नारी।।-6


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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