"मुक्तक"

26 अक्तूबर 2018   |  महातम मिश्रा   (73 बार पढ़ा जा चुका है)


"मुक्तक"


सत्य समर्पित है सदा, लेकर मानक मान।

जगह कहाँ कोई बची, जहाँ नहीं गुणगान।

झूठा भी चलता रहा, पाकर अपनी राह-

झूठ-मूठ का सत्य कब, पाता है बहुमान।।-1


सही अर्थ में देख लें, लाल रंग का खैर।

झूठ सगा होता नहीं, और सगा नहीं गैर।

सत्य कभी होती नहीं, आपस की तकरार-

झूठ कान को भर गया, खूँट बढ़ा गया बैर।।-2


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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