"मुक्तक"

28 अक्तूबर 2018   |  महातम मिश्रा   (70 बार पढ़ा जा चुका है)

आप का दिन मंगलमय हो,


"मुक्तक"


चढ़ा लिए तुम बाण धनुर्धर, अभी धरा हरियाली है।

इंच इंच पर उगे धुरंधर, किसने की रखवाली है।

मुंड लिए माँ काली दौड़ी, शिव की महिमा न्यारी है-

नित्य प्रचंड विक्षिप्त समंदर, गुफा गुफा विकराली है।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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