"मुक्तक"

06 नवम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (5 बार पढ़ा जा चुका है)

रूप चौदस/छोटी दीपावली की सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगल शुभकामना


"मुक्तक"


जलाते दीप हैं मिलकर भगाने के लिए तामस।

बनाते बातियाँ हम सब जलाने के लिए तामस।

सजाते दीप मालिका दिखाने के लिए ताकत-

मगर अंधेर छुप जाती जिलाने के लिए तामस।।-1


विजय आसान कब होती खुली तलवार चलती है।

फिजाओं की तपिश लेकर गली तकरार पलती है।

सुहानी रात की खातिर दिवस बरबाद होता है-

भली यह दीप-मालिका कली अनुसार खिलती है।।-2


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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महातम मिश्रा
10 नवम्बर 2018

हार्दिक धन्यवाद बहन, आज मेल देखा , पंच पर्व की बहुत बहुत बधाई पूरे परिवार को, शुभाशीष बहना

रेणु
07 नवम्बर 2018

आदरणीय भैया | -- मुक्तक बहुत ही प्यारा है हमेशा की तरह आपकी मौलिक पहचान लिए | आपको दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें स्वीकार हों | सपरिवार सकुशल रहें मेरी यही कामना हैं | आपको मेल भी किया था पर शायद आप मेल देखते नही | सादर प्रणाम |

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