यह मेरा जीवन कितना मेरा है ?

23 नवम्बर 2018   |  उदय पूना   (80 बार पढ़ा जा चुका है)

** यह मेरा जीवन कितना मेरा है ? **


यह जीवन जो मैं जी रहा हूं, वो किस का है? वो किस किस का है? हम में से प्रत्येक यह प्रश्न, इस तरह के प्रश्न स्वयं से कर सकता है। यह जीवन जो मैं जी रहा हूं, मैं उसको मेरा कहता हूं, समझता हूं। पर

यह मेरा जीवन कितना मेरा है?


हम कहते तो हैं कि यह मेरा जीवन है;

कौन नहीं कहता यह मेरा जीवन है;

पर यह जीवन, जो हम जी रहे हैं, कितना मेरा है?


हम इस पर चर्चा करते हैं, और हम इस सम्बन्ध में समझेंगे, और जानेगे। ... ... ... .....


यह मेरा जीवन कितना मेरा है?

हम कहते तो हैं कि यह मेरा जीवन मेरा है। .. ... हम इससे जुड़े कुछ पहलुओं को देखते हैं, समझते हैं. .. ... ...


यह मेरा शरीर है;

यह मेरा मकान है; आदि आदि में शब्द "मेरा" का कुछ औचित्य है, हो सकता है, हम यह मान लेते हैं।


पर,

जीवन एक एक का नहीं होता;

जीवन एक एक का अलग अलग नहीं होता;

प्रत्येक का जीवन अलग अलग या प्रथक प्रथक नहीं होता;

जीवन तेरा मेरा अलग अलग नहीं होता।


जीवन सामूहिक है;

जीवन साझा है;

हमारा जीवन अलग अलग नहीं है।


जीवन सृष्टि का हिस्सा है;

जीवन सृष्टि का हिस्सा है;

सृष्टि के साथ एक होकर जीने से ही जीवन जीवन होता है;

फिर, यह मेरा जीवन कितना मेरा है।


यह मेरा जीवन कितना मेरा है?

हम कहते तो हैं कि यह मेरा जीवन मेरा है। .. ... हम इससे जुड़े पहलुओं को देखते हैं, समझते हैं. .. ... ...


प्रकृति की कृपा से मेरा जीवन है;

प्रकृति की कृपा से मेरा जीवन चलता है;

धूप, हवा, पानी, भोजन आदि प्रकृति से ही मिलता है;

फिर, यह मेरा जीवन कितना मेरा है।


कितने जीवों की मृत्यु से मेरा जीवन चलता है;

कितने जीवों की मृत्यु से भोजन मिलता है;

कितने जीवों के सहयोग, योगदान, सहायता से मेरा जीवन चलता है;

फिर, यह मेरा जीवन कितना मेरा है।


हम आपस में जुड़े हैं, परस्पर निर्भर है;

इसी जोड़ से, इसी निर्भरता से, मेरा जीवन है;

यह मेरा जीवन सृष्टि का हिस्सा है;

फिर, यह मेरा जीवन कितना मेरा है।


यह मेरा जीवन कितना मेरा है?

हम कहते तो हैं कि यह मेरा जीवन मेरा है। .. ... हम नें कुछ चर्चा कर ली है। अब एक और पहलू को लेकर, हम देखते हैं, समझते हैं. .. ... ...


कहना तो है यह मेरा जीवन है;

पर हम स्वयं को कितना जानते हैं, पहचानते हैं;

स्वयं को कितना समय देते हैं, स्वयं के साथ कितना रहते हैं;

स्वयं की स्थिति को कितना अच्छा करते हैं;

स्वयं कितने अच्छे से जीवन जीते हैं;

स्वयं के जीवन का, स्वयं का कितना सम्मान करते हैं;

कितने समय सुख, शान्ति, उल्लास, हर्ष, प्रसन्नता, ऊर्जा और होश के साथ होते हैं;

यह मेरा जीवन कितना मेरा है।


स्वयं कहते तो हैं कि यह मेरा जीवन है;

पर इस केलिए हम ऐसा क्या करते हैं;

इस केलिए जो सबसे अच्छा है क्या वो करते हैं;

क्या वैसा ध्यान रखते हैं, जैसा रख सकते हैं;

जो इस के लिए आवश्यक है क्या वो करते हैं;

फिर, यह मेरा जीवन कितना मेरा है।


हम विचार करें, प्रत्येक चिंतन करे, और देखें। ... ..... ......


मैं बाहर बाहर ही रहता हूं;

कितना समय, ऊर्जा दूसरों पर देता हूं;

कितना ध्यान दूसरों पर, अन्य पर देता हूं;

क्या बाहर और दूसरों में उलझे रहना ही मेरा जीवन है?

मुझे स्वयं की, निज की कितनी सुध है?

फिर भी कहना तो वही है - यह मेरा जीवन है;

फिर, यह मेरा जीवन कितना मेरा है??


उदय पूना

अगला लेख: निज भाषा



रेणु
26 नवम्बर 2018

सुस्वागतम आदरणीय सर | एक दिन मैं भी इसी तरह नई आई थी इस मंच पर | जल्द ही सब लोग आपको पहचानने लगेंगे | सादर

रेणु
24 नवम्बर 2018

वाह !!!!!! जीवन के अहम् योगदान की कितनी सटीक व्याख्या कर दी आपने आदरणीय |
मेरी शुभकामनायें और आभार | आपका आत्म कथ्य बहुत प्रेरक है | सादर प्रणाम |

उदय चंद्र जैन
25 नवम्बर 2018

प्रिय रेणु, आपके प्रोत्साहन केलिए मैं आभारी हूं, आपकी शुभकामनाओं से मुझ से और भी लेखन होगा,

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
22 नवम्बर 2018
गु
" गुस्सा -- Balance Sheet दर्पण " हम गुस्सा, करते रहते हैं;और गुस्सा करने को, उचित भी ठहराते रहते हैं;और साथ साथ, यह भी, मानते रहते हैं;कि गुस्सा देता, सिर्फ घाटा; . . . सिर्फ हानी;और होते, कितने नुकसान हैं। . . . इस उलझन को, हम देखते हैं।।1।।. . . जब जब हमारा काम हो जाता है, गुस्सा करने से;स
22 नवम्बर 2018
03 दिसम्बर 2018
क्
भूमिका : जब हम महान उद्देश्य लेकर चलते हैं, महान अभियान पर चलते हैं;बड़े महत्वपूर्ण कार्य को पूर्ण करने केलिए हम सब मिलजुल कर आगे बढ़ते हैं;तब हम उद्देश्य प्राप्ति केलिए संवाद करते हैं। तब हम वास्तविकता से जुड़ते जाने केलिए संवाद करते हैं;जीवन को अच्छा बनाने केलिए संवाद
03 दिसम्बर 2018
18 नवम्बर 2018
शीर्षक - उल्टा सीधा प्रस्तुत है उल्टा पर सीधा करके। जीवन में पूरी पूरी स्वतंत्रता है;जीवन में पूरी पूरी छूट है।हम स्वयं की ऐसी तैसी करते रहें; स्वयं की ऐसी की तैसी करते रहें;स्वयं की पूरी दुर्दशा करते रहें;इसकी भी पूरी पूरी छूट है;हम इसका उल्टा भी कर सकते हैं, यहां इ
18 नवम्बर 2018
16 नवम्बर 2018
कवि एक ऐसा व्यक्ति होता है जो कल्पनाओं में ही इंसान को चांद पर ले जा सकता है और वहां की ताकत ये खुद ही बता सकता है। ऐसी कई कविताओं में वे पूरे ब्राह्मांण को जमीन पर उतार सकते हैं। कविताओं में बहुत ताकत होती है और जिस कवि की कविता दिल को छू जाती है उन्हें हमें और लोगों
16 नवम्बर 2018
23 नवम्बर 2018
गु
" गुस्सा -- Balance Sheet दर्पण "हम गुस्सा, करते रहते हैं;और गुस्सा करने को, उचित भी ठहराते रहते हैं;और साथ साथ, यह भी, मानते रहते हैं;कि गुस्सा देता, सिर्फ घाटा;. . . सिर्फ हानी;और होते, कितने नुकसान हैं। .. . इस उलझन को, हम देखते हैं।।1।।.. .जब जब हमारा काम हो जाता है, गुस्सा करने से;सफलता मिल जात
23 नवम्बर 2018
25 नवम्बर 2018
।। भक्ति-गान।। जय महावीर स्वामी जय महावीर स्वामी, जय महावीर स्वामी, जय महावीर स्वामी।।नित तेरे दर्शन पाऊं, और तेरी कृपा पाऊं स्वामी;सामने भी आओ स्वामी, कृपा की वर्षा करो स्वामी;जय महावीर स्वामी, जय महावीर स्वामी।।नित तेरा नाम जपूं, तेरे मार्ग
25 नवम्बर 2018
24 नवम्बर 2018
क्
क्या चाहिए जीवन केलिए जीवन सुन्दर है, जीवन आंनद है, प्रत्येक व्यक्ति केलिए;पर हम, स्वयं की कैद में रहते हैं, घुट घुटकर मरने केलिए। जो कमाई करते रहते हैं, केवल पेट पालने केलिए;वो भर पेट भोजन क्यों त्यागते, केवल कमाई करने केलिए। न जाने क्या क्या जुटाते रहते हैं, बाद में
24 नवम्बर 2018
28 नवम्बर 2018
दो
- = + = दोराहा - = + =हर क्षण, नया क्षण, सदा साथ लाता है दोराहा हर क्षण, नया क्षण, सदा साथ लाता है दोराहा;भटकन से भरा, स्थायित्व से भरा होता है दोराहा। जिसे जो राह चलन
28 नवम्बर 2018
02 दिसम्बर 2018
भूमिका : हम देखते हैं, पाते हैं कि अलग अलग व्यक्ति अलग अलग ढ़ंग से, अपने अपने ढ़ंग से ही जीवन जी रहे हैं। बहुत मौटे तौर पर, हम इसको 3 श्रेणी में रख सकते हैं या 3 संभावनाओं के रूप में देख सकते हैं। हरेक के जीवन में हर प्रकार के क्षण आते हैं, उतार चढ़ाव आते हैं, पर कुल मि
02 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
II अनुभव : एक निज सेतु IIहमारा निज अनुभव, मनोभाव के स्तर पर, हमें बतलाता है कि भविष्य में स्वयं के अंदर कैसे भाव उभरेंगे ? अंदर के भावों की द्रष्टि से, निज अनुभव हमारे स्वयं के लिए हमारे स्वयं के वर्तमान से निकलते हुये भविष्य की झलक
07 दिसम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x