गुस्सा -- Balance Sheet दर्पण

23 नवम्बर 2018   |  उदय पूना   (67 बार पढ़ा जा चुका है)

" गुस्सा -- Balance Sheet दर्पण "


हम गुस्सा, करते रहते हैं;
और गुस्सा करने को, उचित भी ठहराते रहते हैं;
और साथ साथ, यह भी, मानते रहते हैं;
कि गुस्सा देता, सिर्फ घाटा;
. . . सिर्फ हानी;
और होते, कितने नुकसान हैं।
.
.
.
इस उलझन को, हम देखते हैं।।1।।
.
.
.

जब जब हमारा काम हो जाता है, गुस्सा करने से;
सफलता मिल जाती है, गुस्सा करने से;
जब जब हमारे मन का हो जाता है, गुस्सा करने से।

तब तब हम गुस्सा कर ने के पक्ष में, गुस्सा की आवश्यकता, महत्त्व को लेकर आश्वस्त हो जाते हैं;
और मानने लगते हैं कि गुस्सा करना अनिवार्य है, चिल्लाना, डांटना अनिवार्य है।

जब जब हमको, गुस्सा करने से, मिल जाती है सफलता;
तब तब हम गाने लगते हैं, गुस्सा गाथा।
और आदत ऐसी पड़ती, गुस्सा करने की;
स्वयं तो गुस्सा करते ही हैं; और वकालत करते, स्वजनों से इसकी;
श्रेय देते गुस्सा करने की आदत को, और विजय गाथा गाते स्वयं की।।2।।


आओ, हम;
इस जीत में, छिपी हार को देखते हैं;
इस फायदे में, छिपे नुकसान को देखते हैं;
इस तुरंत के फायदे में;
लम्बे समय में होने वाले नुकसान केलिए, छिपे आमंत्रण को देखते हैं।।3।।


गुस्सा करने से, कौनसा काम हो जाता है?
गुस्सैल व्यक्ति को, क्या लाभ मिल जाता है?
गुस्सा कहां काम कर पाता है?

जो काम बहुत कम समय केलिए, महत्वपूर्ण होता है;
जो कार्य, पूरे जीवान के उपयोग का नहीं है;
गुस्सा करने से, अधिक से अधिक, केवल इस प्रकार के क्षेत्र में सफलता मिल सकती है।

पर जो असीमित सम्भावनायें हैं, सही में बड़े काम हैं;
गुस्सा कर कर के हम, बड़े काम के रास्ते में और कठिनाइयां खड़ी कर देते हैं;
उनके रास्ते, लगभग लगभग बंद कर देते हैं।

जो कार्य पूरे जीवन केलिए, उपयोगी हैं;
जो कार्य लम्बे समय केलिए, आवश्कय हैं;
उनके रास्तों को, लगभग लगभग बंद कर देते हैं;
उनकी संभावनाओं को, लगभग लगभग समाप्त कर देते हैं।

इक्का दुक्का पेड़ों के चक्कर में, पूरा जंगल ठुकरा देते हैं;
इक्का दुक्का पेड़ों के चक्कर में, पूरा जंगल ठुकरा देते हैं।

तुरंत तुरंत के चक्कर में, पूरा जीवन बिसरा देते हैं;
तुरंत तुरंत के चक्कर में, पूरा जीवन बिसरा देते हैं।।4।।


गुस्से से जुड़े लाभ, हानी को देख ने की, समझने की हमारी क्षमता बढ़ती रहे;
जो हमारे लिए उचित है, हम वही करें, वही हमारे चरित्र में उतरा रहे।

गुस्सा करने के पहले ही सचेत हो जाएँ, ऐसी अंतर्दृष्टि जगी रहे;
गुस्से से जुड़े लाभ, हानी साफ दिखें, ऐसी दूरदृष्टि भी जगी रहे।।5।।


उदय चंद्र जैन, 9284737432

अगला लेख: निज भाषा



रेणु
24 नवम्बर 2018

जी आदरणीय अंतर्दृष्टि को जगाने की प्रेरणा भरी रचना बहुत अछि है सचमुच गुस्से से कभी योगदान नहीं मिला दुनिया को बस नुकसान ही नुक्सान हुए हैं सार्थक रचना के लिए आभार और नमन |

उदय चंद्र जैन
25 नवम्बर 2018

प्रिय रेणु, आपका प्रोत्साहन पाकर मैं आभारी हूं,

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
04 दिसम्बर 2018
जी
जीवन यात्रा कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;बचपन से जवानी, जवानी से बुढ़ापे की ओर।. . . . जवानी से बुढ़ापे की ओर।। जीवन में आते हैं, कुछ ऐसे क्षण;शादी, सेवनिवृत्ती हैं, कुछ ऐसे ही क्षण। जब बदल जाती है जिंदगी, एकदम से;. . . . एकदम से;सिर्फ एक कदम च
04 दिसम्बर 2018
22 नवम्बर 2018
गु
" गुस्सा -- Balance Sheet दर्पण " हम गुस्सा, करते रहते हैं;और गुस्सा करने को, उचित भी ठहराते रहते हैं;और साथ साथ, यह भी, मानते रहते हैं;कि गुस्सा देता, सिर्फ घाटा; . . . सिर्फ हानी;और होते, कितने नुकसान हैं। . . . इस उलझन को, हम देखते हैं।।1।।. . . जब जब हमारा काम हो जाता है, गुस्सा करने से;स
22 नवम्बर 2018
18 नवम्बर 2018
मै
मैं कट्टर नहीं हूं स्वयं को भारतीय कहना, मानव कहना कट्टरता नहीं है; अपनी जड़ों से जुड़े रहना; जो समूचे विश्व को एक माने, एक कुटम्ब माने, ऐसी जड़ों से जुड़े रहना कट्टरता नहीं है।
18 नवम्बर 2018
18 नवम्बर 2018
शीर्षक - उल्टा सीधा प्रस्तुत है उल्टा पर सीधा करके। जीवन में पूरी पूरी स्वतंत्रता है;जीवन में पूरी पूरी छूट है।हम स्वयं की ऐसी तैसी करते रहें; स्वयं की ऐसी की तैसी करते रहें;स्वयं की पूरी दुर्दशा करते रहें;इसकी भी पूरी पूरी छूट है;हम इसका उल्टा भी कर सकते हैं, यहां इ
18 नवम्बर 2018
28 नवम्बर 2018
नि
विशेष : आओ हिंदी भाषा को लेकर कुछ चर्चा करें, हिंदी की सेवा करें।** निज भाषा ** (1) - ( प्रस्तावना )मैं हि
28 नवम्बर 2018
23 नवम्बर 2018
** यह मेरा जीवन कितना मेरा है ? ** यह जीवन जो मैं जी रहा हूं, वो किस का है? वो किस किस का है? हम में से प्रत्येक यह प्रश्न, इस तरह के प्रश्न स्वयं से कर सकता है। यह जीवन जो मैं जी रहा हूं, मैं उसको मेरा कहता हूं, समझता हूं। परयह मेरा जीवन कितना मेरा है?हम कहते तो हैं कि यह मेरा जीवन है;कौन नहीं कहता
23 नवम्बर 2018
05 दिसम्बर 2018
वि
विपरीत के विपरीत कुछ-कुछ लोग कुछ-कुछ शब्दों को भूल गए, बिसर गए;हमारे पास शब्द हैं, उपयुक्त शब्द हैं, पर कमजोर शब्द पर आ गए। कुछ-कुछ शब्दों के अर्थ भी भूल गए, बिसर गए;और गलत उपयोग शुरू हो गए;मैं भी इन कुछ-कुछ लोगों में हूं, हम जागरूकता से क्यों दूर हो गए।।अनिवार्य है,इस विपरीत धारा के विपरीत जाना;भाष
05 दिसम्बर 2018
24 नवम्बर 2018
क्
क्या चाहिए जीवन केलिए जीवन सुन्दर है, जीवन आंनद है, प्रत्येक व्यक्ति केलिए;पर हम, स्वयं की कैद में रहते हैं, घुट घुटकर मरने केलिए। जो कमाई करते रहते हैं, केवल पेट पालने केलिए;वो भर पेट भोजन क्यों त्यागते, केवल कमाई करने केलिए। न जाने क्या क्या जुटाते रहते हैं, बाद में
24 नवम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x