निदा फ़ाज़ली -कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे In Hindi

27 नवम्बर 2018   |  अंकिशा मिश्रा   (41 बार पढ़ा जा चुका है)

निदा फ़ाज़ली -कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे In Hindi  - शब्द (shabd.in)

Hindi poem -Nida Fazli

कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे


कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे

वो बदन जब भी सजे कोई नया ख्वाब लगे


एक चुप चाप सी लड़की, न कहानी न ग़ज़ल

याद जो आये कभी रेशम-ओ-किम्ख्वाब लगे


अभी बे-साया है दीवार कहीं लोच न ख़म

कोई खिड़की कहीं निकले कहीं मेहराब लगे


घर के आँगन मैं भटकती हुई दिन भर की थकन

रात ढलते ही पके खेत सी शादाब लगे


निदा फ़ाज़ली -कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे In Hindi  - शब्द (shabd.in)

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