निदा फ़ाज़ली -दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती In Hindi

27 नवम्बर 2018   |  अंकिशा मिश्रा   (12 बार पढ़ा जा चुका है)

निदा फ़ाज़ली -दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती In Hindi  - शब्द (shabd.in)

Hindi poem -Nida Fazli


दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती


दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती

ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती


कुछ लोग यूँ ही शहर में हमसे भी ख़फा हैं

हर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलती


देखा था जिसे मैंने कोई और था शायद

वो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती


हँसते हुए चेहरों से है बाज़ार की ज़ीनत

रोने को यहाँ वैसे भी फुरसत नहीं मिलती


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