"हाइकु"

29 नवम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (68 बार पढ़ा जा चुका है)

"हाइकु"


कलम चली

सुंदर अलंकार

दिव्य सृजन।।-1


मन मुग्धता

धन्य हुई नगरी

कवि कल्पना।।-2


सार्थक चित्र

कलम में धार है

सुंदर शिल्प।।-3


कवि कविता

शब्द छंद पावन

हिंदी दिवस।।-4


लेख आलेख

कलम चितचोर

मान सम्मान।।-5


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी


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वज़्न--212 212 212 212 अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— लुभाते (आते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल"छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहेझूठ के सामने सच छुपाते रहे जान लेते हक़ीकत अगर वक्त कीसच कहुँ रूठ जाते ऋतु रिझाते रहे।।ये सहज तो न था खेलना आग सेप्यास को आब जी भर प
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