अक्सर...

30 नवम्बर 2018   |  Harshad kalidas molishree   (5 बार पढ़ा जा चुका है)

अक्सर... यूँ अक्सर जिंदगी सताती है.... कभी हसाती है, कभी रुलाती है... यूँ अक्सर जिंदगी सताती है... ये कुछ सिखाती... कुछ यह कहना चाहती है... कभी बनाती है, कभी बिगाड़ती है... यूँ अक्सर जिंदगी सताती है... ये कही कहा ले जाती है, ये क्यों उलझाती है... कभी रास्ते बिछड़ते है, कभी मंजिले रुस्वा होजाती है.... ये जिंदगी.... यूँ अक्सर सताती है कभी हारती है, कभी जीताती है... बेवजह सी बातों में अक्सर खो जाती है... हस्ते हुए आँखों में आंसू दे जाती है... जिंदगी... यू अक्सर सताती है... रोते रोते, कभी आंसू सुख जाते है.... रोते हुए कभी खुदको भूल जाते है.... कभी किसीके प्यार मैं कभी किसीकी याद में बेतहाशा रुलाती है..... ये जिंदगी अक्सर सताती है.... कभी याद बनजाती है, कभी नासूर बनजाती है... कभी पलों में सौबातें कह जाती है, कभी अरसों तंहां रह जाती है.... कभी खिलखाले के हसाती है, कभी जोरोसे मुस्कुराती है.... ये जिंदगी अक्सर सताती है... कभी मासूम तो कभी हैवान बन जाती है... हर पहलूँ में कुछ अलग दिखाती है.... गम में कुछ और खुशियों में कुछ और जताती है... जिंदगी अक्सर सताती है.... जिंदा है वो लोग जो जिंदगी को समझ पाते है... हर पल जिंदगी को जी भर के जी जाते है.... यूँ तो जिंदगी सताती है, मगर पल है ये जब जिंदगी ही एक नई जिंदगी की राह दिखाती है.... ये जिंदगी.... जी भर के जियो हर पल... ये अक्सर जीना सिखाती है....

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