फ़साना

04 दिसम्बर 2018   |  शिशिर मधुकर   (16 बार पढ़ा जा चुका है)

फ़साना  - शब्द (shabd.in)

मुहब्बत कर तो ली मैंने, मगर लुट कर ये जाना है

मुकम्मल हो नहीं सकता, ये बस ऐसा फ़साना है


ख्वाब तो लुट गए सारे, अब तो मायूस बैठा हूँ

टूटे ख्वाबों की लाशों को, उमर भर अब उठाना है


कोई दिल की नहीं सुनता, सभी रिश्तों के हामी हैं

बड़ा नफरत भरा भीतर से, पर सारा ज़माना है

वो करता है, वो डरता है, संवरता है, मुकरता है

मेरा महबूब कुछ उम्मीद से, ज्यादा सयाना है


कभी ममता की ज़ंजीरें, कभी रिश्तों की बेडी हैं

मेरा महबूब तो मधुकर, फ़कत करता बहाना है



अगला लेख: ये बारिश प्रेम की



रेणु
06 दिसम्बर 2018

वो करता है, वो डरता है, संवरता है, मुकरता है
मेरा महबूब कुछ उम्मीद से, ज्यादा सयाना है!!!!!!!!!!!!!
क्या बात है आदरणीय शिशिर जी -- महबूब से शिकवे का ये अंदाज बहुत निराला और सरस है | हार्दिक बधाई भावपूर्ण रचना के लिए | सादर --

शिशिर मधुकर
07 दिसम्बर 2018

तहे दिल से शुक्रिया आदरणीय रेणु जी. आपकी प्रतिक्रियाएं मन को उत्साहित करती हैं.

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
22 नवम्बर 2018
Hindi poem - Kumar vishwasभ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामाभ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामाहमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामाअभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत कामैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामाकभी कोई जो खुलकर हंस लिया दो पल तो हंगामाकोई ख़्वाबों में आकर बस लिया द
22 नवम्बर 2018
04 दिसम्बर 2018
ढूँढते हैं निशां तेरे, जब भी बगिया में आते हैंमुहब्बत के गीत भंवरे, यहाँ अब भी सुनाते हैं ज़रा मौसम यहाँ बदला, डालियाँ सज गई सारी बिना तेरे फूल खिलते हुए, पर ना लुभाते हैंमैं तो चुप हूँ मगर, झरने तो हरदम शोर करते हैंतड़प के आह भर, ये तो तुम्हें अ
04 दिसम्बर 2018
22 नवम्बर 2018
Hindi poem - Kumar vishwas बांसुरी चली आओ तुम अगर नहीं आई गीत गा न पाऊँगासाँस साथ छोडेगी, सुर सजा न पाऊँगातान भावना की है शब्द-शब्द दर्पण हैबाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण हैतुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी हैतीर पार कान्हा से दूर राधिका-सी हैरात की उदासी को याद संग खेला है कुछ गलत ना कर बैठें मन ब
22 नवम्बर 2018
20 नवम्बर 2018
Hindi poem - koshish karne walon ki लहरों से डर कर नौका पार नहीं होतीकोशिश करने वालों की हार नहीं होतीनन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती हैचढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती हैमन का विश्वास रगों में साहस भरता हैचढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता हैआख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होतीकोशिश करने वालों की हार नहीं
20 नवम्बर 2018
09 दिसम्बर 2018
यूँ ही ना चैन से बैठो, ज़रा कोशिश तुम भी कर लोबेडियां तोड़ दो जग की, मुझको आगोश में भर लोनिभाते जाओगे क्या उम्र भर, केवल धरम अपनापरेशानी हर एक इंसान की, ना खुद के ही सर लो ज़माना क्या दिखेगा खुद ही गर, तुम उड़ नहीं सकतींएक परवाज़ ऊँची सी भरो, और फैला
09 दिसम्बर 2018
12 दिसम्बर 2018
ढूँढते हैं तुम्हें जब भी, किसी महफिल में जाते हैंसिवा तेरे हाल ए दिल औरों को, हम ना बताते हैं ढूँढ़ने का सबब तुमको, जो कोई पूछे यहाँ हमसेकई बरसों की शनासाई है, फ़कत हम ये जताते हैंप्यार नज़रों से मिलता है, जुबां से फूल झरते हैंबोल मीठे तेरे दिल को हमारे, कुछ ऐसे सुहाते हैं
12 दिसम्बर 2018
12 दिसम्बर 2018
छवि एक दूजे की दिल में, जहाँ में जब समाती है तभी बदनॉ को आपस में, महक फूलों की आती है अगर है मैल इस दिल में, हर इक रिश्ता हैं बेमानीना जाने क्यों मगर दुनिया यहाँ, इनको निभाती हैएक उल्फ़त के प्यासे को, जहाँ मिलती है ये दौलतदरो दीवार उस घर की, उसे हर पल बुलाती हैबड़ा
12 दिसम्बर 2018
04 दिसम्बर 2018
ढूँढते हैं निशां तेरे, जब भी बगिया में आते हैंमुहब्बत के गीत भंवरे, यहाँ अब भी सुनाते हैं ज़रा मौसम यहाँ बदला, डालियाँ सज गई सारी बिना तेरे फूल खिलते हुए, पर ना लुभाते हैंमैं तो चुप हूँ मगर, झरने तो हरदम शोर करते हैंतड़प के आह भर, ये तो तुम्हें अ
04 दिसम्बर 2018
19 नवम्बर 2018
हर एक काम निपुणता से करता हूँ,फिर क्यूं सबकी आँखों को खलता हूँ,गाँव -गाँव शिक्षा की अलख जगाता हूँ,नित प्रति बच्चों को सबक सिखाता हूँ गर्व मुझे कि मैं प्राइमरी का मास्टर कहलाता हूँ।।सबको स्वाभिमान से रहना सिखलाता हूँ,सबको हर एक अच्छी बात बताता हूँ प्रतिदिन मेन्यू से एम.डी.एम बनवाता हूँ,खुद चखकर तब बच
19 नवम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
किस्मत के धोखे,ज़िन्दगी में, जब भी आते हैंकुछ भी करो, दिल को मगर, वो तो दुखाते हैंकभी सोचा ना था, यूँ ज़िन्दगी भी, रूठ जाएगीकुछ अपने , मुझे तो कोस के , हरदम सताते हैं मेरी कमजोरियां, मुझपे हमेशा, राज करती हैंसितारे भी, नई कोई राह ना, मुझको दिखाते हैं बिना चाहत के रिश्तों के, बोझ सब, सह नहीं सकते मेर
07 दिसम्बर 2018
13 दिसम्बर 2018
चाह फूलों की थी मुझको, मगर कांटों ने घेरा हैनज़ारा कौन सा कुदरत ने देखो, पर उकेरा है मुहब्बत की चाह रखना, गुनाह कोई नहीं होतामगर इस वक्त ने देखो, हर एक, सपना बिखेरा हैरात तन्हाई की देखो, अब तो इतनी हुई लम्बीना ही तो नींद आती है, ना ही, होता सवेरा हैखुशी की चाह में मैंने, कभी अपनों की ना मानीमेरे दिल
13 दिसम्बर 2018
09 दिसम्बर 2018
कोई नाता है जन्मों का, तभी तो याद आती हैतेरी हर चीज़ यूँ ही थोड़े, मेरे मन को लुभाती हैमेरे खूं का हर इक कतरा, खुशी में झूम उठता हैमुझे आवाज़ दे और मुस्कान दे, जब तू बुलाती है जब भी आगोश में भर के, तूने मस्तक ये चूमा हैहजारों फूल खिलते हैं, गीत धड़कन भी गाती हैतेरी ह
09 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
तेरी मेरी मुहब्बत का मज़ा अल्लाह भी लेता हैतभी कुछ दूरियां वो दरम्यान हम सबको देता है लाख कोशिश करी मैंने, और सबने भी समझायाये मन राहें मुहब्बत में, ना पर कहने से चेता है अब ये जां मेरी तुम ही कहो , आ
07 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
एक तुम ही हो जिसने, मेरा जीवन संवारा हैमेरी इन धड़कनों ने नाम, बस तेरा पुकारा है मतलब का कोई खेल, न ये बातें मेरी समझोहर एक लफ्ज में मैंने दिया, तुमको इशारा हैएक तुम ही नहीं तन्हा, बेबसी मैं भी सहती हूँकितनी दुश्वारियों से वक्त, सोचो मैंने ग
07 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
लो वादा कर दिया मैंने तुम्हें ना याद करने कारकीबों को मिलेगा अब पूरा मौका संवरने कामेरी चिंता नहीं करना मौत मुझको ना आएगीमुझे मालूम है रस्ता हर एक ग़म से उबरने कासभी ये जानते हैं छोर पे उस कुछ ना पाओगेलेकिन मज़ा कितना है राहे उल्फ़त गुजरने काख्वाइशें तैरने की तो ज़माने भर की रहती हैंसफलता को मगर फन चा
07 दिसम्बर 2018
12 दिसम्बर 2018
ढूँढते हैं तुम्हें जब भी, किसी महफिल में जाते हैंसिवा तेरे हाल ए दिल औरों को, हम ना बताते हैं ढूँढ़ने का सबब तुमको, जो कोई पूछे यहाँ हमसेकई बरसों की शनासाई है, फ़कत हम ये जताते हैंप्यार नज़रों से मिलता है, जुबां से फूल झरते हैंबोल मीठे तेरे दिल को हमारे, कुछ ऐसे सुहाते हैं
12 दिसम्बर 2018
13 दिसम्बर 2018
चाह फूलों की थी मुझको, मगर कांटों ने घेरा हैनज़ारा कौन सा कुदरत ने देखो, पर उकेरा है मुहब्बत की चाह रखना, गुनाह कोई नहीं होतामगर इस वक्त ने देखो, हर एक, सपना बिखेरा हैरात तन्हाई की देखो, अब तो इतनी हुई लम्बीना ही तो नींद आती है, ना ही, होता सवेरा हैखुशी की चाह में मैंने, कभी अपनों की ना मानीमेरे दिल
13 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
तेरी मेरी मुहब्बत का मज़ा अल्लाह भी लेता हैतभी कुछ दूरियां वो दरम्यान हम सबको देता है लाख कोशिश करी मैंने, और सबने भी समझायाये मन राहें मुहब्बत में, ना पर कहने से चेता है अब ये जां मेरी तुम ही कहो , आ
07 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
तेरे मेरे बीच ना अब कोई दीवार हैजानेमन तू जान ले ये ही तो प्यार हैचढ़ गया एक बार तो उतरेगा ही नहींइस इश्क में होता सदा ऐसा खुमार है तू पास है मुझको पता चल ही जाएगा खुशबू भरी आती अगर कोई बयार हैतू मुस्कुरा रही है गर तन्हाई में कहीं फूलों में दिख जाती मुझको बहार है जो सुख मुझे तेरे क़रीब आने से मिलेमध
07 दिसम्बर 2018
09 दिसम्बर 2018
कोई नाता है जन्मों का, तभी तो याद आती हैतेरी हर चीज़ यूँ ही थोड़े, मेरे मन को लुभाती हैमेरे खूं का हर इक कतरा, खुशी में झूम उठता हैमुझे आवाज़ दे और मुस्कान दे, जब तू बुलाती है जब भी आगोश में भर के, तूने मस्तक ये चूमा हैहजारों फूल खिलते हैं, गीत धड़कन भी गाती हैतेरी ह
09 दिसम्बर 2018
20 नवम्बर 2018
Hindi poem - Hidden Feeling of Love खामोश हूँ आज मैं कुछ तो बात है ये ख़ामोशी क्यूँ है पता नहीं , कुछ तो बात है...हर दिन हर पल एक अजीब एहसास है ज़िंदगी का ये मेरे साथ अच्छा मज़ाक है फिर भी में खामोश हूँ कुछ तो बात है….साथ रहता है कोई तो अच्छा लगता है उस कोई का मतलब क्या
20 नवम्बर 2018
23 नवम्बर 2018
Ramdhari Singh Dinkar - Hindi poem हो कहाँ अग्निधर्मा नवीन ऋषियों – रामधारी सिंह “दिनकर”कहता हूँ¸ ओ मखमल–भोगियो।श्रवण खोलो¸रूक सुनो¸ विकल यह नादकहां से आता है।है आग लगी या कहीं लुटेरे लूट रहे?वह कौन दूर पर गांवों में चिल्लाता है?जनता की छाती भिदेंऔर तुम नींद करो¸अपने भर तो यह जुल्म नहीं होने दूँगा।त
23 नवम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x