"पद" कोयल कुहके पिय आजाओ, साजन तुम बिन कारी रैना,डाल पात बन छाओ।।

04 दिसम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (58 बार पढ़ा जा चुका है)

"पद"


कोयल कुहके पिय आजाओ,

साजन तुम बिन कारी रैना, डाल-पात बन छाओ।।


बोल विरह सुर गाती मैना, नाहक मत तरसाओ ।

भूल हुई क्यों कहते नाहीं, आकर के समझाओ।।


जतन करूँ कस कोरी गगरी, जल पावन भर लाओ।

सखी सहेली मारें ताना, राग इतर मत गाओ।।


बोली ननद जिठानी गोली, आ देवर धमकाओ।

बनो सुरक्षा कवच हमारो, हरियाली लहराओ।।


सुन लो अपना फर्ज निभाओ, मत झूठे इतराओ।

गौतम तुम बिन जग अँधियारा, ला सूरज दिखलाओ।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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महातम मिश्रा
06 दिसम्बर 2018

रचना को विशिष्ट श्रेणी का सम्मान प्रदान करने के लिए मंच का हृदय से आभारी हूँ

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