जीवन यात्रा

04 दिसम्बर 2018   |  उदय पूना   (31 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन यात्रा


कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;

बचपन से जवानी, जवानी से बुढ़ापे की ओर।

. . . . जवानी से बुढ़ापे की ओर।।


जीवन में आते हैं, कुछ ऐसे क्षण;

शादी, सेवनिवृत्ती हैं, कुछ ऐसे ही क्षण।

जब बदल जाती है जिंदगी, एकदम से;

. . . . एकदम से;

सिर्फ एक कदम चलने से।

. . . . सिर्फ एक कदम चलने से।।


कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;

एक चरण से अगले चरण की ओर।

. . अगले चरण की ओर; . . . अगले चरण की ओर।।


जीवन में वो क्षण भी आता है;

जब जिंदगी पूर्ण विराम पाती, एकदम से;

शरीर बंद करता, एक भी कदम चलने से।

. . . . एक भी कदम चलने से।

जीवन भर तैयारी चला करे,

प्रसन्नता से, मिलना हो सके उस क्षण से।

. . . . मिलना हो सके उस क्षण से।।


जिसको याद रहता, जीवन यात्रा है मृत्यु की ओर;

उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।

. . . . उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।।


कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;

कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, मृत्यु की ओर।

. . . . . मृत्यु की ओर; . . . . . . . . मृत्यु की ओर।।



जिसको याद रहता, जीवन यात्रा है, मृत्यु की ओर;

उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।

. . . . उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।।



उदय पूना

अगला लेख: निज भाषा



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
24 नवम्बर 2018
क्
क्या चाहिए जीवन केलिए जीवन सुन्दर है, जीवन आंनद है, प्रत्येक व्यक्ति केलिए;पर हम, स्वयं की कैद में रहते हैं, घुट घुटकर मरने केलिए। जो कमाई करते रहते हैं, केवल पेट पालने केलिए;वो भर पेट भोजन क्यों त्यागते, केवल कमाई करने केलिए। न जाने क्या क्या जुटाते रहते हैं, बाद में
24 नवम्बर 2018
19 नवम्बर 2018
हर एक काम निपुणता से करता हूँ,फिर क्यूं सबकी आँखों को खलता हूँ,गाँव -गाँव शिक्षा की अलख जगाता हूँ,नित प्रति बच्चों को सबक सिखाता हूँ गर्व मुझे कि मैं प्राइमरी का मास्टर कहलाता हूँ।।सबको स्वाभिमान से रहना सिखलाता हूँ,सबको हर एक अच्छी बात बताता हूँ प्रतिदिन मेन्यू से एम.डी.एम बनवाता हूँ,खुद चखकर तब बच
19 नवम्बर 2018
20 नवम्बर 2018
Hindi poem - Hidden Feeling of Love खामोश हूँ आज मैं कुछ तो बात है ये ख़ामोशी क्यूँ है पता नहीं , कुछ तो बात है...हर दिन हर पल एक अजीब एहसास है ज़िंदगी का ये मेरे साथ अच्छा मज़ाक है फिर भी में खामोश हूँ कुछ तो बात है….साथ रहता है कोई तो अच्छा लगता है उस कोई का मतलब क्या
20 नवम्बर 2018
24 नवम्बर 2018
जी
जीवन जीना आता ही नहींहम को जीना आता ही नहीं; हम को जीना आता ही नहीं ;हम को जीना आता ही नहीं।कहीं पहुंच जाने के चक्कर में रहते हैं;जीवन यात्रा का आनंद जाना ही नहीं।और, और, और अधिक चाहते रहते हैं;नया पकड़ने केलिए, मुट्ठी ढ़ीली करना आता ही नहीं।दूसरों को जिम्मेदार ठहरता रहता है;बदलना तो स्वयं को है, पर स
24 नवम्बर 2018
19 नवम्बर 2018
ऐतराज़...एक दौर है ये जहाँ तन्हां रात में वक़्त कट्टा नही... वो भी एक दौर था जहाँ वक़्त की सुईयों को पकड़ू तो वक़्त ठहरता नही... एक दौर है ये जहाँ नजर अंदाज शौक से कर दिए जाते है... वो भी एक दौर था... जहाँ चुपके चुपके आँखों मैं मीचे जाते थे
19 नवम्बर 2018
23 नवम्बर 2018
जी
जीवन जीना आता ही नहीं हम को जीना आता ही नहीं; हम को जीना आता ही नहीं ; हम को जीना आता ही नहीं। कहीं पहुंच जाने के चक्कर में रहते हैं;जीवन यात्रा का आनंद जाना ही नहीं। और, और, और अधिक चाहते रहते हैं;नया पकड़ने केलिए, मुट्ठी ढ़ीली करना आता ही नहीं। दूसरों को जिम्मेदार ठहरता रहता है;बदलना तो स्वयं को है,
23 नवम्बर 2018
22 नवम्बर 2018
गु
" गुस्सा -- Balance Sheet दर्पण " हम गुस्सा, करते रहते हैं;और गुस्सा करने को, उचित भी ठहराते रहते हैं;और साथ साथ, यह भी, मानते रहते हैं;कि गुस्सा देता, सिर्फ घाटा; . . . सिर्फ हानी;और होते, कितने नुकसान हैं। . . . इस उलझन को, हम देखते हैं।।1।।. . . जब जब हमारा काम हो जाता है, गुस्सा करने से;स
22 नवम्बर 2018
24 नवम्बर 2018
क्
क्या चाहिए जीवन केलिए जीवन सुन्दर है, जीवन आंनद है, प्रत्येक व्यक्ति केलिए;पर हम, स्वयं की कैद में रहते हैं, घुट घुटकर मरने केलिए। जो कमाई करते रहते हैं, केवल पेट पालने केलिए;वो भर पेट भोजन क्यों त्यागते, केवल कमाई करने केलिए। न जाने क्या क्या जुटाते रहते हैं, बाद में
24 नवम्बर 2018
09 दिसम्बर 2018
मा
मां पहले पत्नी थी; पत्नी रूप में कितना था सम्मान ??मां का, समाज, व्यक्ति और संतान, करें इतना सम्मान;<p style="color: rgb(34, 34, 34); font-fam
09 दिसम्बर 2018
16 नवम्बर 2018
जी
जीवन और परम्परा परम्परा होती है परम्परा, जीवन नहीं; परम्परा होती है जीवन केलिए, परम्परा केलिए जीवन नहीं; जीवन प्रथम है परम्परा नहीं; जो परम्परा जीवन विरोधी हो जाए उसको कभी मानना नहीं; समय में पीछे झांक
16 नवम्बर 2018
18 नवम्बर 2018
शीर्षक - उल्टा सीधा प्रस्तुत है उल्टा पर सीधा करके। जीवन में पूरी पूरी स्वतंत्रता है;जीवन में पूरी पूरी छूट है।हम स्वयं की ऐसी तैसी करते रहें; स्वयं की ऐसी की तैसी करते रहें;स्वयं की पूरी दुर्दशा करते रहें;इसकी भी पूरी पूरी छूट है;हम इसका उल्टा भी कर सकते हैं, यहां इ
18 नवम्बर 2018
20 नवम्बर 2018
Hindi poem - koshish karne walon ki लहरों से डर कर नौका पार नहीं होतीकोशिश करने वालों की हार नहीं होतीनन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती हैचढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती हैमन का विश्वास रगों में साहस भरता हैचढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता हैआख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होतीकोशिश करने वालों की हार नहीं
20 नवम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x