जीवन यात्रा

04 दिसम्बर 2018   |  उदय पूना   (68 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन यात्रा


कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;

बचपन से जवानी, जवानी से बुढ़ापे की ओर।

. . . . जवानी से बुढ़ापे की ओर।।


जीवन में आते हैं, कुछ ऐसे क्षण;

शादी, सेवनिवृत्ती हैं, कुछ ऐसे ही क्षण।

जब बदल जाती है जिंदगी, एकदम से;

. . . . एकदम से;

सिर्फ एक कदम चलने से।

. . . . सिर्फ एक कदम चलने से।।


कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;

एक चरण से अगले चरण की ओर।

. . अगले चरण की ओर; . . . अगले चरण की ओर।।


जीवन में वो क्षण भी आता है;

जब जिंदगी पूर्ण विराम पाती, एकदम से;

शरीर बंद करता, एक भी कदम चलने से।

. . . . एक भी कदम चलने से।

जीवन भर तैयारी चला करे,

प्रसन्नता से, मिलना हो सके उस क्षण से।

. . . . मिलना हो सके उस क्षण से।।


जिसको याद रहता, जीवन यात्रा है मृत्यु की ओर;

उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।

. . . . उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।।


कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;

कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, मृत्यु की ओर।

. . . . . मृत्यु की ओर; . . . . . . . . मृत्यु की ओर।।



जिसको याद रहता, जीवन यात्रा है, मृत्यु की ओर;

उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।

. . . . उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।।



उदय पूना

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