जीवन यात्रा

04 दिसम्बर 2018   |  उदय पूना   (50 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन यात्रा


कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;

बचपन से जवानी, जवानी से बुढ़ापे की ओर।

. . . . जवानी से बुढ़ापे की ओर।।


जीवन में आते हैं, कुछ ऐसे क्षण;

शादी, सेवनिवृत्ती हैं, कुछ ऐसे ही क्षण।

जब बदल जाती है जिंदगी, एकदम से;

. . . . एकदम से;

सिर्फ एक कदम चलने से।

. . . . सिर्फ एक कदम चलने से।।


कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;

एक चरण से अगले चरण की ओर।

. . अगले चरण की ओर; . . . अगले चरण की ओर।।


जीवन में वो क्षण भी आता है;

जब जिंदगी पूर्ण विराम पाती, एकदम से;

शरीर बंद करता, एक भी कदम चलने से।

. . . . एक भी कदम चलने से।

जीवन भर तैयारी चला करे,

प्रसन्नता से, मिलना हो सके उस क्षण से।

. . . . मिलना हो सके उस क्षण से।।


जिसको याद रहता, जीवन यात्रा है मृत्यु की ओर;

उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।

. . . . उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।।


कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, आगे की ओर;

कदम कदम, जिन्दगी बढ़ती रहती, मृत्यु की ओर।

. . . . . मृत्यु की ओर; . . . . . . . . मृत्यु की ओर।।



जिसको याद रहता, जीवन यात्रा है, मृत्यु की ओर;

उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।

. . . . उसके अंदर प्रसन्नता रहती, चाहे जाए किसी भी ओर।।



उदय पूना

अगला लेख: निज भाषा



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
22 नवम्बर 2018
गु
" गुस्सा -- Balance Sheet दर्पण " हम गुस्सा, करते रहते हैं;और गुस्सा करने को, उचित भी ठहराते रहते हैं;और साथ साथ, यह भी, मानते रहते हैं;कि गुस्सा देता, सिर्फ घाटा; . . . सिर्फ हानी;और होते, कितने नुकसान हैं। . . . इस उलझन को, हम देखते हैं।।1।।. . . जब जब हमारा काम हो जाता है, गुस्सा करने से;स
22 नवम्बर 2018
28 नवम्बर 2018
नि
विशेष : आओ हिंदी भाषा को लेकर कुछ चर्चा करें, हिंदी की सेवा करें।** निज भाषा ** (1) - ( प्रस्तावना )मैं हि
28 नवम्बर 2018
03 दिसम्बर 2018
क्
भूमिका : जब हम महान उद्देश्य लेकर चलते हैं, महान अभियान पर चलते हैं;बड़े महत्वपूर्ण कार्य को पूर्ण करने केलिए हम सब मिलजुल कर आगे बढ़ते हैं;तब हम उद्देश्य प्राप्ति केलिए संवाद करते हैं। तब हम वास्तविकता से जुड़ते जाने केलिए संवाद करते हैं;जीवन को अच्छा बनाने केलिए संवाद
03 दिसम्बर 2018
09 दिसम्बर 2018
मा
मां पहले पत्नी थी; पत्नी रूप में कितना था सम्मान ??मां का, समाज, व्यक्ति और संतान, करें इतना सम्मान;<p style="color: rgb(34, 34, 34); font-fam
09 दिसम्बर 2018
17 दिसम्बर 2018
" आगे क्या होगा " -- हम क्यों मानकर चलें कि आगे बुरा ही होगा : प्रस्तावना, भूमिका क्या हमें पता होता है कि भविष्य में क्या क्या होने वाला है ??पर दिन-प्रतिदिन के जीवन में हमें यदा-कदा अनुभव होता है कि हम मानकर चलने लगतें हैं "आगे बुर
17 दिसम्बर 2018
20 नवम्बर 2018
Hindi poem - Hidden Feeling of Love खामोश हूँ आज मैं कुछ तो बात है ये ख़ामोशी क्यूँ है पता नहीं , कुछ तो बात है...हर दिन हर पल एक अजीब एहसास है ज़िंदगी का ये मेरे साथ अच्छा मज़ाक है फिर भी में खामोश हूँ कुछ तो बात है….साथ रहता है कोई तो अच्छा लगता है उस कोई का मतलब क्या
20 नवम्बर 2018
23 नवम्बर 2018
गु
" गुस्सा -- Balance Sheet दर्पण "हम गुस्सा, करते रहते हैं;और गुस्सा करने को, उचित भी ठहराते रहते हैं;और साथ साथ, यह भी, मानते रहते हैं;कि गुस्सा देता, सिर्फ घाटा;. . . सिर्फ हानी;और होते, कितने नुकसान हैं। .. . इस उलझन को, हम देखते हैं।।1।।.. .जब जब हमारा काम हो जाता है, गुस्सा करने से;सफलता मिल जात
23 नवम्बर 2018
24 नवम्बर 2018
जी
जीवन जीना आता ही नहींहम को जीना आता ही नहीं; हम को जीना आता ही नहीं ;हम को जीना आता ही नहीं।कहीं पहुंच जाने के चक्कर में रहते हैं;जीवन यात्रा का आनंद जाना ही नहीं।और, और, और अधिक चाहते रहते हैं;नया पकड़ने केलिए, मुट्ठी ढ़ीली करना आता ही नहीं।दूसरों को जिम्मेदार ठहरता रहता है;बदलना तो स्वयं को है, पर स
24 नवम्बर 2018
24 नवम्बर 2018
क्
क्या चाहिए जीवन केलिए जीवन सुन्दर है, जीवन आंनद है, प्रत्येक व्यक्ति केलिए;पर हम, स्वयं की कैद में रहते हैं, घुट घुटकर मरने केलिए। जो कमाई करते रहते हैं, केवल पेट पालने केलिए;वो भर पेट भोजन क्यों त्यागते, केवल कमाई करने केलिए। न जाने क्या क्या जुटाते रहते हैं, बाद में
24 नवम्बर 2018
06 दिसम्बर 2018
झगड़ा और दुश्मनीयदि आपस में कुछ या गंभीर;मनमुटाव, गलतफहमी, तकलीफ, घाटा आदि हो जाये;और बहुत गुस्सा आ जाये;तो भले ही छोटा झगड़ा कर लेना;पर दुश्मनी करना नहीं।। दुश्मनी कर लेने के बाद, पछताना ही शेष रहता है;फिर रिश्ता बचता ही नहीं; फिर से एक
06 दिसम्बर 2018
18 दिसम्बर 2018
** ज्ञान की ओर - ( मनन - 2 ) **हम ज्ञान की ओर तभी बढ़ेंगे;जब हमें जानने की इच्छा हो;उत्सुकता हो;हमारे स्वयं के निज ज्ञान में क्या है या क्या नहीं है कि स्पष्टता हो;हमारे स्वयं के निज अनुभव में क्या आया है या क्या नहीं आया है कि स्पष्टता हो। एक उदाहरण लेलें, तो बात औ
18 दिसम्बर 2018
24 नवम्बर 2018
क्
क्या चाहिए जीवन केलिए जीवन सुन्दर है, जीवन आंनद है, प्रत्येक व्यक्ति केलिए;पर हम, स्वयं की कैद में रहते हैं, घुट घुटकर मरने केलिए। जो कमाई करते रहते हैं, केवल पेट पालने केलिए;वो भर पेट भोजन क्यों त्यागते, केवल कमाई करने केलिए। न जाने क्या क्या जुटाते रहते हैं, बाद में
24 नवम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x