"मुक्त काव्य" जीवन शरण जीवन मरण है अटल सच दिनकर किरण

05 दिसम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (22 बार पढ़ा जा चुका है)

शीर्षक- जीवन, मरण ,मोक्ष ,अटल और सत्य


"मुक्त काव्य"


जीवन शरण जीवन मरण

है अटल सच दिनकर किरण

माया भरम तारक मरण

वन घूमता स्वर्णिम हिरण

मातु सीता का हरण

क्या देख पाया राम ने

जिसके लिए जीवन लिया

दर-बदर नित भ्रमणन किया

चोला बदलता रह गया

क्या रोक पाया चाँद ने

उस चाँदनी का पथ छरण

ऋतु साथ आती पतझड़ी

फिर शाख पर किसकी कड़ी

चलकर हवाएँ कब मुड़ी

जब आ गई मृत्यु मोक्ष ले

कब रोक पाता आवरण

जीवन शरण जीवन मरण

है अटल सच दिनकर किरण।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "मुक्तक"



महातम मिश्रा
09 दिसम्बर 2018

बहुत बहुत धन्यवाद बहन, शुभाशीष, स्वागतम

रेणु
08 दिसम्बर 2018

जीवन शरण जीवन मरण
है अटल सच दिनकर किरण
माया भरम तारक मरण
वन घूमता स्वर्णिम हिरण!!!!!!!!

आदरणीय भैया--- कितनी सुंदर रचना है | सरल , सहज और मधुर शब्दों में जीवन का दर्शन !!
शब्द नगरी के माथे का ताज बनी है | मेरे हार्दिक शुभकामनायें और बधाई |




महातम मिश्रा
08 दिसम्बर 2018

मंच व मित्रों का हृदय से आभारी हूँ, मुक्त काव्य को श्रेष्ठ रचना का सम्मान देने के लिए व मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित करने के लिए, सादर नमन

उदय पूना
06 दिसम्बर 2018

मृत्यु जीवन का सत्य है, सुन्दर चित्रण किया, बधाई, प्रणाम

महातम मिश्रा
08 दिसम्बर 2018

बहुत बहुत धन्यवाद श्री उदय पूना जी, आभारी हूँ आप का , स्वागतम

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