"मुक्त काव्य" जीवन शरण जीवन मरण है अटल सच दिनकर किरण

05 दिसम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (100 बार पढ़ा जा चुका है)

शीर्षक- जीवन, मरण ,मोक्ष ,अटल और सत्य


"मुक्त काव्य"


जीवन शरण जीवन मरण

है अटल सच दिनकर किरण

माया भरम तारक मरण

वन घूमता स्वर्णिम हिरण

मातु सीता का हरण

क्या देख पाया राम ने

जिसके लिए जीवन लिया

दर-बदर नित भ्रमणन किया

चोला बदलता रह गया

क्या रोक पाया चाँद ने

उस चाँदनी का पथ छरण

ऋतु साथ आती पतझड़ी

फिर शाख पर किसकी कड़ी

चलकर हवाएँ कब मुड़ी

जब आ गई मृत्यु मोक्ष ले

कब रोक पाता आवरण

जीवन शरण जीवन मरण

है अटल सच दिनकर किरण।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "मुक्तक"



महातम मिश्रा
09 दिसम्बर 2018

बहुत बहुत धन्यवाद बहन, शुभाशीष, स्वागतम

रेणु
08 दिसम्बर 2018

जीवन शरण जीवन मरण
है अटल सच दिनकर किरण
माया भरम तारक मरण
वन घूमता स्वर्णिम हिरण!!!!!!!!

आदरणीय भैया--- कितनी सुंदर रचना है | सरल , सहज और मधुर शब्दों में जीवन का दर्शन !!
शब्द नगरी के माथे का ताज बनी है | मेरे हार्दिक शुभकामनायें और बधाई |




महातम मिश्रा
08 दिसम्बर 2018

मंच व मित्रों का हृदय से आभारी हूँ, मुक्त काव्य को श्रेष्ठ रचना का सम्मान देने के लिए व मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित करने के लिए, सादर नमन

उदय पूना
06 दिसम्बर 2018

मृत्यु जीवन का सत्य है, सुन्दर चित्रण किया, बधाई, प्रणाम

महातम मिश्रा
08 दिसम्बर 2018

बहुत बहुत धन्यवाद श्री उदय पूना जी, आभारी हूँ आप का , स्वागतम

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
22 नवम्बर 2018
"
आधार छंद - सरसी (अर्द्ध सम मात्रिक) शिल्प विधान सरसी छंद- चौपाई + दोहे का सम चरण मिलकर बनता है। मात्रिक भार- 16, 11 = 27 चौपाई के आरम्भ में द्विकल+त्रिकल +त्रिकल वर्जित है। अंत में गुरु /वाचिक अनिवार्य। दोहे के सम चरणान्त में 21 अनिवार्य है"गीत" लहराती फसलें खेतों की, झूमें गाँव किसानबरगद पीपल खलिहा
22 नवम्बर 2018
29 नवम्बर 2018
"
"हाइकु" कलम चलीसुंदर अलंकार दिव्य सृजन।।-1मन मुग्धताधन्य हुई नगरीकवि कल्पना।।-2सार्थक चित्रकलम में धार हैसुंदर शिल्प।।-3कवि कविताशब्द छंद पावनहिंदी दिवस।।-4लेख आलेखकलम चितचोरमान सम्मान।।-5महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
29 नवम्बर 2018
04 दिसम्बर 2018
"
"पद"कोयल कुहके पिय आजाओ,साजन तुम बिन कारी रैना, डाल-पात बन छाओ।।बोल विरह सुर गाती मैना, नाहक मत तरसाओ ।भूल हुई क्यों कहते नाहीं, आकर के समझाओ।।जतन करूँ कस कोरी गगरी, जल पावन भर लाओ।सखी सहेली मारें ताना, राग इतर मत गाओ।।बोली ननद जिठानी गोली, आ देवर धमकाओ।बनो सुरक्षा कव
04 दिसम्बर 2018
01 दिसम्बर 2018
छंद - द्विगुणित पदपादाकुलक चौपाई (राधेश्यामी) गीत, शिल्प विधान मात्रा भार - 16 , 16 = 32 आरम्भ में गुरु और अंत में 2 गुरु "राधेश्यामी गीत" अब मान और सम्मान बेच, मानव बन रहा निराला है।हर मुख पर खिलती गाली है, मन मोर हुआ मतवाला है।।किससे कहना किसको कहना, मानो यह गंदा नाला है।सुनने वाली भल जनता है, कह
01 दिसम्बर 2018
02 दिसम्बर 2018
"
लघुकथा "अब कितनी बार बाँटोगे"अब कितनी बार बाँटोगे यही कहकर सुनयना ने सदा के लिए अपनी बोझिल आँख को बंद कर लिया। आपसी झगड़े फसाद जो बंटवारे को लेकर हल्ला कर रहे थे कुछ दिनों के लिए ही सही रुक गए। सुनयना के जीवन का यह चौथा बंटवारा था जिसको वह किसी भी कीमत पर देखना नहीं चाहती थी। सबने एक सुर से यही कहा
02 दिसम्बर 2018
24 नवम्बर 2018
"
"मुक्तक"युग बीता बीता पहर, लेकर अपना मान।हाथी घोड़ा पालकी, थे सुंदर पहचान।अश्व नश्ल विश्वास की, नाल चाक-चौबंद-राणा सा मालिक कहाँ, कहाँ चेतकी शान।।-1घोड़ा सरपट भागता, हाथी झूमे द्वार।राजमहल के शान थे, धनुष बाण तलवार।चाँवर काँवर पागड़ी, राज चाक- चौबंद-स्मृतियों में अब शेष हैं, प्रिय सुंदर उपहार।।-2महातम
24 नवम्बर 2018
24 नवम्बर 2018
जी
जीवन जीना आता ही नहींहम को जीना आता ही नहीं; हम को जीना आता ही नहीं ;हम को जीना आता ही नहीं।कहीं पहुंच जाने के चक्कर में रहते हैं;जीवन यात्रा का आनंद जाना ही नहीं।और, और, और अधिक चाहते रहते हैं;नया पकड़ने केलिए, मुट्ठी ढ़ीली करना आता ही नहीं।दूसरों को जिम्मेदार ठहरता रहता है;बदलना तो स्वयं को है, पर स
24 नवम्बर 2018
12 दिसम्बर 2018
"
"हाइकु" ठंडी की ऋतुघर घर अलावबुझती आग।।-1गैस का चूल्हान आग न अलावठिठुरे हाथ।।-2नया जमानासुलगता हीटर धुआँ अलाव।।-3नोटा का कोटाअसर दिखलायामुरझा फूल।।-4खिला गुलाबउलझा हुआ काँटामूर्छित मन।।-5महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
12 दिसम्बर 2018
23 नवम्बर 2018
जी
जीवन जीना आता ही नहीं हम को जीना आता ही नहीं; हम को जीना आता ही नहीं ; हम को जीना आता ही नहीं। कहीं पहुंच जाने के चक्कर में रहते हैं;जीवन यात्रा का आनंद जाना ही नहीं। और, और, और अधिक चाहते रहते हैं;नया पकड़ने केलिए, मुट्ठी ढ़ीली करना आता ही नहीं। दूसरों को जिम्मेदार ठहरता रहता है;बदलना तो स्वयं को है,
23 नवम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x