विपरीत के विपरीत

05 दिसम्बर 2018   |  उदय पूना   (49 बार पढ़ा जा चुका है)

विपरीत के विपरीत


कुछ-कुछ लोग कुछ-कुछ शब्दों को भूल गए, बिसर गए;

हमारे पास शब्द हैं, उपयुक्त शब्द हैं, पर कमजोर शब्द पर आ गए।


कुछ-कुछ शब्दों के अर्थ भी भूल गए, बिसर गए;

और गलत उपयोग शुरू हो गए;

मैं भी इन कुछ-कुछ लोगों में हूं, हम जागरूकता से क्यों दूर हो गए।।


अनिवार्य है,

इस विपरीत धारा के विपरीत जाना;

भाषा उपयोग में सावधान रहना;


किस का दायित्व है ?

निज-भाषा की गरिमा बनाये रखना;

समय के साथ स्तर बनाये रखना।।


सहायता मिलाती जाए, मेरा हिन्दी ज्ञान बढ़ता जाए, कोई जानकार मिल जाए;

प्रत्येक कुछ कुछ जानता है, उतना योगदान करता जाए;

आपस के सहयोग से, एक दूसरे का हिन्दी ज्ञान बढ़ता जाए।।


भारत माता की स्वतंत्रता, सम्मान की रक्षा, है हमारा धर्म;

इस हेतु, निज भाषा की उत्कृष्टता बनाये रखना भी हमारा धर्म।।


उदय पूना,

९२८४७ ३७४३२,

92847 37432;

अगला लेख: निज भाषा



उदय पूना
07 दिसम्बर 2018

लिखने वाला क्या चाहे ? पढ़ने वाले से प्रशंसा चाहे; मेरा प्रोत्साहन करने केलिए आभार

ममता
06 दिसम्बर 2018

nice sir

उदय पूना
06 दिसम्बर 2018

प्रिय ममता, आभार, प्रणाम

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