विपरीत के विपरीत

05 दिसम्बर 2018   |  उदय पूना   (96 बार पढ़ा जा चुका है)

विपरीत के विपरीत


कुछ-कुछ लोग कुछ-कुछ शब्दों को भूल गए, बिसर गए;

हमारे पास शब्द हैं, उपयुक्त शब्द हैं, पर कमजोर शब्द पर आ गए।


कुछ-कुछ शब्दों के अर्थ भी भूल गए, बिसर गए;

और गलत उपयोग शुरू हो गए;

मैं भी इन कुछ-कुछ लोगों में हूं, हम जागरूकता से क्यों दूर हो गए।।


अनिवार्य है,

इस विपरीत धारा के विपरीत जाना;

भाषा उपयोग में सावधान रहना;


किस का दायित्व है ?

निज-भाषा की गरिमा बनाये रखना;

समय के साथ स्तर बनाये रखना।।


सहायता मिलाती जाए, मेरा हिन्दी ज्ञान बढ़ता जाए, कोई जानकार मिल जाए;

प्रत्येक कुछ कुछ जानता है, उतना योगदान करता जाए;

आपस के सहयोग से, एक दूसरे का हिन्दी ज्ञान बढ़ता जाए।।


भारत माता की स्वतंत्रता, सम्मान की रक्षा, है हमारा धर्म;

इस हेतु, निज भाषा की उत्कृष्टता बनाये रखना भी हमारा धर्म।।


उदय पूना,

९२८४७ ३७४३२,

92847 37432;

अगला लेख: निज भाषा



उदय पूना
07 दिसम्बर 2018

लिखने वाला क्या चाहे ? पढ़ने वाले से प्रशंसा चाहे; मेरा प्रोत्साहन करने केलिए आभार

ममता
06 दिसम्बर 2018

nice sir

उदय पूना
06 दिसम्बर 2018

प्रिय ममता, आभार, प्रणाम

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
21 नवम्बर 2018
महादेवी वर्मा हिंदी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक है |शचीरानी गुर्टू ने भी महादेवी वर्मा की कविता (Mahadevi verma poems) को सुसज्जित भाषा का अनुपम उदाहरण मान
21 नवम्बर 2018
22 नवम्बर 2018
Hindi poem - Kumar vishwas बांसुरी चली आओ तुम अगर नहीं आई गीत गा न पाऊँगासाँस साथ छोडेगी, सुर सजा न पाऊँगातान भावना की है शब्द-शब्द दर्पण हैबाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण हैतुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी हैतीर पार कान्हा से दूर राधिका-सी हैरात की उदासी को याद संग खेला है कुछ गलत ना कर बैठें मन ब
22 नवम्बर 2018
23 नवम्बर 2018
Ramdhari Singh Dinkar - Hindi poem परिचय – रामधारी सिंह “दिनकर”सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैंस्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैंबँधा हूँ, स्वप्न हूँ, लघु वृत हूँ मैंनहीं तो व्योम का विस्तार हूँ मैंसमाना चाहता, जो बीन उर मेंविकल उस शून्य की झंकार हूँ मैंभटकता खोजता हूँ, ज्
23 नवम्बर 2018
23 नवम्बर 2018
Ramdhari Singh Dinkar - Hindi poem कलम, आज उनकी जय बोल – रामधारी सिंह “दिनकर”जला अस्थियाँ बारी-बारीचिटकाई जिनमें चिंगारी,जो चढ़ गये पुण्यवेदी परलिए बिना गर्दन का मोलकलम, आज उनकी जय बोल।जो अगणित लघु दीप हमारेतूफानों में एक किनारे,जल-जलाकर बुझ गए किसी दिनमाँगा नहीं स्नेह मुँह खोलकलम, आज उनकी जय बोल।पी
23 नवम्बर 2018
22 नवम्बर 2018
Hindi poem - Kumar vishwasउनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलती उनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलतीहमको ही खासकर नहीं मिलती शायरी को नज़र नहीं मिलतीमुझको तू ही अगर नहीं मिलती रूह मे, दिल में, जिस्म में, दुनियाढूंढता हूँ मगर
22 नवम्बर 2018
17 दिसम्बर 2018
" आगे क्या होगा " -- हम क्यों मानकर चलें कि आगे बुरा ही होगा : प्रस्तावना, भूमिका क्या हमें पता होता है कि भविष्य में क्या क्या होने वाला है ??पर दिन-प्रतिदिन के जीवन में हमें यदा-कदा अनुभव होता है कि हम मानकर चलने लगतें हैं "आगे बुर
17 दिसम्बर 2018
03 दिसम्बर 2018
क्
भूमिका : जब हम महान उद्देश्य लेकर चलते हैं, महान अभियान पर चलते हैं;बड़े महत्वपूर्ण कार्य को पूर्ण करने केलिए हम सब मिलजुल कर आगे बढ़ते हैं;तब हम उद्देश्य प्राप्ति केलिए संवाद करते हैं। तब हम वास्तविकता से जुड़ते जाने केलिए संवाद करते हैं;जीवन को अच्छा बनाने केलिए संवाद
03 दिसम्बर 2018
18 दिसम्बर 2018
** ज्ञान की ओर - ( मनन - 2 ) **हम ज्ञान की ओर तभी बढ़ेंगे;जब हमें जानने की इच्छा हो;उत्सुकता हो;हमारे स्वयं के निज ज्ञान में क्या है या क्या नहीं है कि स्पष्टता हो;हमारे स्वयं के निज अनुभव में क्या आया है या क्या नहीं आया है कि स्पष्टता हो। एक उदाहरण लेलें, तो बात औ
18 दिसम्बर 2018
10 दिसम्बर 2018
कु
कुछ कुछ - किस्त पहलीमेरी ओर से प्रयास, एक लघु कदम, मेरे हिंदी के ज्ञान में सुधार हेतु। जो भी हिंदी के जानकार हैं, विद्वान हैं, उनसे निवेदन है, आग्रह है की वो आगे आयें। इस कार्य में योगदान, सहयोग, सहायता करें। इस उद्देश्य के साथ लेख प्रक
10 दिसम्बर 2018
06 दिसम्बर 2018
झगड़ा और दुश्मनीयदि आपस में कुछ या गंभीर;मनमुटाव, गलतफहमी, तकलीफ, घाटा आदि हो जाये;और बहुत गुस्सा आ जाये;तो भले ही छोटा झगड़ा कर लेना;पर दुश्मनी करना नहीं।। दुश्मनी कर लेने के बाद, पछताना ही शेष रहता है;फिर रिश्ता बचता ही नहीं; फिर से एक
06 दिसम्बर 2018
13 दिसम्बर 2018
माध्यम की भाषा (1)जिस कार्य-क्षेत्र में उपयोग में आती रहे जो भाषा; उस क्षेत्र केलिए विकसित होती रहती वो भाषा। काम केलिए उपयोग में न लाएं निज-भाषा; फिर क्यों कहें विकसित नहीं हमारी निज भाष।।(2)व्यक्तिगत क्षमता, सामूहिक क्षमता में; सार्वजनिक रूप में, सरकारी काम में;भ
13 दिसम्बर 2018
22 नवम्बर 2018
गु
" गुस्सा -- Balance Sheet दर्पण " हम गुस्सा, करते रहते हैं;और गुस्सा करने को, उचित भी ठहराते रहते हैं;और साथ साथ, यह भी, मानते रहते हैं;कि गुस्सा देता, सिर्फ घाटा; . . . सिर्फ हानी;और होते, कितने नुकसान हैं। . . . इस उलझन को, हम देखते हैं।।1।।. . . जब जब हमारा काम हो जाता है, गुस्सा करने से;स
22 नवम्बर 2018
22 नवम्बर 2018
डॉ.कुमार विश्वास “कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है”कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी 1970 को पिलखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डॉ. चन्द्रपाल शर्मा आर एस
22 नवम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x