यह भी होता हे यहीं

06 दिसम्बर 2018   |  क्षमा राधे   (6 बार पढ़ा जा चुका है)

जब धुप लगी उसको तो ,

छाया कर दी उसने अपने ही सर का

पल्लु उड़ा


जब भुख लगी उसको ,

तब पेट उसका भरा ,

अपने हिस्से में आई आधी रोटी

भी उसको खिला


किन्तु - आश्चर्य हे या बिडम्ब्ना -

इतने बड़े घर में,


नहीं मिली उन दोनों को ,

अपना हि सर ढकने की थोड़ी

सि भी जगह !


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