सम्बन्ध

06 दिसम्बर 2018   |  उदय पूना   (11 बार पढ़ा जा चुका है)

सम्बन्ध


सम्बन्ध, यानि बराबरी का बंधन, मन से स्वीकार किया जाता है;

सम्बन्ध, किसी प्रकार की कोई मजबूरी नहीं।


सम्बन्ध, आपसी प्यार, समझ, साझा उद्देश्य से आगे बढ़ता है;

सामान्यता सम्बन्ध में कुछ भी थोपना नहीं।


कोई विशेष स्थिति में थोपने की आवश्यकता पड़ भी सकती है;

पर दादागिरी से सम्बन्ध चलता ही नहीं।


सम्बन्ध मन से होता है, सम्बन्ध में समझना,सहना होता रहता है;

पर किसी भी प्रकार का दबना, दबाना नहीं।


यहां तो दोनों तरफ से बराबर बंधन है, इसलिए सम्बन्ध है;

जो एक तरफा हो उसे सम्बन्ध कहते ही नहीं।


जो व्यक्ति स्वयं से ही खुश न हो;

वो किसी के साथ खुश कैसे होगा ?

उसे खुश करने का उपाय होता ही नहीं।


उदय पूना

9284737432

अगला लेख: निज भाषा



रेणु
06 दिसम्बर 2018

जी बहुत सही संबंधों का आधार आखिर निर्मल लगाव ही तो है | सादर --

उदय पूना
07 दिसम्बर 2018

हां, निर्मल लगाव संबंधों केलिए अनिवार्य हैं, फिर से आभार

उदय पूना
07 दिसम्बर 2018

आभार, प्रणाम

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