झगड़ा और दुश्मनी

06 दिसम्बर 2018   |  उदय पूना   (98 बार पढ़ा जा चुका है)

झगड़ा और दुश्मनी


यदि आपस में कुछ या गंभीर;

मनमुटाव, गलतफहमी, तकलीफ, घाटा आदि हो जाये;

और बहुत गुस्सा आ जाये;

तो भले ही छोटा झगड़ा कर लेना;

पर दुश्मनी करना नहीं।


दुश्मनी कर लेने के बाद, पछताना ही शेष रहता है;

फिर रिश्ता बचता ही नहीं;

फिर से एक हो जाने का रास्ता खुला रहता नहीं।


व्यथित न हो जायें, फिर से एक होने की संभावना शेष रहती है,

फिर से एक होना कठिन हो जाता है;

पर असंभव रहता नहीं।


आपस में फिर से एक हो जाना चाहिए;

यदि दुश्मनी का कारण शेष रहता नहीं।


आपस के प्यार का, साथ बीते अच्छे समय का, सम्मान करना;

और लम्बा झगड़ा, गंभीर झगड़ा जल्दी में शुरू करना नहीं।

यदि करना भी पड़े तो;

फिर से एक हो जाने का रास्ता खुला रखना;

सबंध की मर्यादा के बहार जाना नहीं।


आपस की दुश्मनी में भी मर्यादा पालन करना;

और परिवार, समाज, देश, मानवता, प्रकृति के विरुद्ध जाना नहीं


आपस में फिर से एक हो जाना चाहिए;

यदि दुश्मनी का कारण शेष रहता नहीं।


उदय पूना


विशेष :

मैं यहां झगड़े और दुश्मनी के शब्दों में स्पष्ट अंतर लेकर चला हूं;

मैं इसको बतला देता हूं;

आपस में झगड़ा हो जाना बड़ी बात नही;

पर दुश्मनी करना साधारण बात नहीं।


प्यार और साथ साथ रहते हुए;

झगड़ा हो सकता है;

पर दुश्मनी और प्यार एक साथ होते नहीं।


झगड़ा हुआ करता है;

आहत होने की अभिव्यक्ति, गुस्सा करना;

कुछ कठोरता से शिकायत करना;

स्वयं के साथ जो बुरा हुआ वो बतलाना;

यह सिर्फ बातों तक ही सीमित रहता है;

इसमें सामनेवाले का नुकसान करना समलित नहीं।


दुश्मनी में एक दूसरे के विरोध में उतर आते हैं, विरोधी बन जाते हैं;

झगड़े में एक दूसरे के विरोधी बनते नहीं।


दुश्मनी में समलित है;

विधिवत, योजना बध्द तरीके से, पीछे से;

षडयंत रच छति पहुंचाना;

केवल शिकायत करने तक, शब्दों तक, यह सीमित रहता नहीं।


उदय पूना

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रेणु
06 दिसम्बर 2018

बहुत बढिया आदरणीय सर - लाख टके की बात कही आपने | आज यही संकुचित मानसिकता आपसी सद्भावना की शत्रु बनी हुई है | सादर आभार और नमन |

उदय पूना
07 दिसम्बर 2018

हां, हम जीवन और प्रकृति की पवित्रता का सम्मान करें, आभार

उदय पूना
07 दिसम्बर 2018

आभार, pranam

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