सच से मुकरने का

07 दिसम्बर 2018   |  शिशिर मधुकर   (93 बार पढ़ा जा चुका है)

सच से मुकरने का

लो वादा कर दिया मैंने तुम्हें ना याद करने का

रकीबों को मिलेगा अब पूरा मौका संवरने का


मेरी चिंता नहीं करना मौत मुझको ना आएगी

मुझे मालूम है रस्ता हर एक ग़म से उबरने का


सभी ये जानते हैं छोर पे उस कुछ ना पाओगे

लेकिन मज़ा कितना है राहे उल्फ़त गुजरने का


ख्वाइशें तैरने की तो ज़माने भर की रहती हैं

सफलता को मगर फन चाहिए गहरे उतरने का

तुम्हारी मुश्किलें सारी ख़त्म अब हो ही जाएंगी

कोई अवसर ना आएगा अब सच से मुकरने का



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