इशारा

07 दिसम्बर 2018   |  शिशिर मधुकर   (10 बार पढ़ा जा चुका है)

इशारा  - शब्द (shabd.in)

एक तुम ही हो जिसने, मेरा जीवन संवारा है

मेरी इन धड़कनों ने नाम, बस तेरा पुकारा है


मतलब का कोई खेल, न ये बातें मेरी समझो

हर एक लफ्ज में मैंने दिया, तुमको इशारा है


एक तुम ही नहीं तन्हा, बेबसी मैं भी सहती हूँ

कितनी दुश्वारियों से वक्त, सोचो मैंने गुजारा है


मझधार में छूटा है जब से, साथिया का साथ

मैं ही ये जानती हूँ, कैसे मैंने, खुद को उबारा है


भले मैं दूर हूँ तुम से, मगर तुम जान लो ये सच

मेरे खूं का हर कतरा, मधुकर केवल तुम्हारा है

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रेणु
07 दिसम्बर 2018

बहुत खूब !!!!!!!!!!

रेणु
07 दिसम्बर 2018

आदरणीय शिशिर जी-- बहुत ही मार्मिक शेर हैं | सभी बहुत अच्छे लगे पर ये खास है --
एक तुम ही नहीं तन्हा, बेबसी मैं भी सहती हूँ
कितनी दुश्वारियों से वक्त, सोचो मैंने गुजारा है!!!!!!! कितना दर्द छुपा है इन सरल सी पंक्तियों में | सादर आभार |

शिशिर मधुकर
08 दिसम्बर 2018

तहे दिल से शुक्रिया आदरणीय रेणु जी ........

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