अनुभव : एक निज सेतु

07 दिसम्बर 2018   |  उदय पूना   (9 बार पढ़ा जा चुका है)

II अनुभव :
एक निज सेतु II

हमारा निज अनुभव, मनोभाव के स्तर पर, हमें बतलाता है कि भविष्य में स्वयं के अंदर कैसे भाव उभरेंगे ? अंदर के भावों की द्रष्टि से, निज अनुभव हमारे स्वयं के लिए हमारे स्वयं के वर्तमान से निकलते हुये भविष्य की झलक दिखलाता है।

निज अनुभव;
भविष्य की झलक है;
इसी दिशा में
स्वयं बढ़ते जाएं तो जो मिल सकता है, उसी की झलक है।

अनुभव में जो भाव अभी आ रहें हैं, उसी तरह के भाव आगे भी रहेंगे।


निज अनुभव;
जिस दिशा में स्वयं चलने से आया है;
जिस दिशा में स्वयं चलने से प्राप्त हुआ है।

उसी दिशा में स्वयं चलते जाएं, बढ़ते जाएं तो आगे क्या है;

उसको दिखलाना, बतलाना शुरूं करता है;
निज अनुभव।।1।।


यदि यही चाहिए तो आगे बढ़ते जाएं, यदि यही स्वीकृत है, यदि इसी में राजी हैं तो आगे बढ़ते जाएं;
अन्यथा, मुझे मेरे इच्छित भाव की प्राप्ति अन्य दिशा में मिलेगी;
यह स्पष्ट हो जाता है, यह स्पष्ट हो जाता है।

इस दिशा में किसी अन्य को क्या मिला, इस दिशा में किसी अन्य को क्या मिला;

उससे हमारे स्वयं केलिए कोई विशेष मतलब नहीं;
जो हम को स्वयं को मिल सकता है, निज अनुभव उसको बतलाता है।।2।।

प्राप्ति कहें, उत्थान कहें, या पहुंचना कहें;
वही प्रमुख है, प्रधान है, मुख्य है, या कहें प्रथम है;
हम वही दिशा पकड़ें जो सहाय हो, जो मेरे स्वयं केलिय सहाय हो।

किसी एक दिशा को;
किसी तथाकथित विशिष्ट दिशा को;
किसी अन्य, सफल व्यक्ति की दिशा को;
पकड़ ने की जिद न करें, हठ न करें;
निज अनुभव जो मार्ग-दर्शन करता है उसका सम्मान करें।।3।।


निज अनुभव सेतु है, निज अनुभव का सम्मान करना सेतु है;
जीवन में सफल होने केलिए, जीवन जीने केलिए;
स्वयं को पहचानने केलिए, समझने केलिए;
स्वयं से जुड़ ने केलिए, स्वयं को प्राप्त करने केलिए;
स्वयं के स्वभाव में स्थापित होने केलिए;

निज अनुभव सेतु है, निज अनुभव का सम्मान करना सेतु है।।4।।


अनुभव तभी पता चलता है, अनुभव का सही पता तभी चलता है;
जब हम स्वयं सहज होते हैं।
किसी दबाव में नहीं होते हैं, किसी के प्रभाव में नहीं होते हैं;
कुछ प्रमाणित करने के चक्कर में नहीं होते हैं, किसी को कुछ दिखाने के चक्कर में नहीं होते हैं;
किसी सिद्धांत के चक्कर में, प्रभाव में नहीं होते हैं;
किसी विश्वास, मान्यता के चक्कर में, प्रभाव में नहीं होते हैं।
किसी भी प्रकार की जल्दी में नहीं होते हैं;
किसी कार्य को पूरा करने, समाप्त करने, निपटाने के चक्कर में नहीं होते हैं;
किसी परेशानी से तुरंत मुक्ति पाने के चक्कर में नहीं होते हैं;
किसी Short-Cut के चक्कर में नहीं होते हैं।।5।।


निज अनुभव क्या है, समझते हैं। ........

निज अनुभव मतलब स्वयं को अंदर कैसा लगता है, अंदर क्या भाव आता है;
स्वयं को अंदर क्या अंतर पड़ता है, अच्छा लगता है, बुरा लगता है, या कोई अंतर नहीं पड़ता है।
अंदर शांति मिलती है या अशांति मिलती है;
मेरी ऊर्जा बढ़ती है या घटती है।
मेरा विस्तार होता है या मैं सिकुड़ जाता हूं;
मैं सहज रहता हूं या असहज हो जाता हूं।
मेरा मनोबल बढ़ता है या गिर जाता है;
मेरे अंदर जीवन खिलने लगता है या मुरझाने लगता है।।6।।


निज अनुभव;
भविष्य की झलक है;
इसी दिशा में स्वयं बढ़ते जाएं तो जो मिल सकता है, उसी की झलक है;
अनुभव, एक निज सेतु है, जो भविष्य से जुड़ा होने के कारण उसकी झलक दिखलाता है।

अनुभव, एक निज सेतु है।


उदय पूना

अगला लेख: निज भाषा



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
13 दिसम्बर 2018
माध्यम की भाषा (1)जिस कार्य-क्षेत्र में उपयोग में आती रहे जो भाषा; उस क्षेत्र केलिए विकसित होती रहती वो भाषा। काम केलिए उपयोग में न लाएं निज-भाषा; फिर क्यों कहें विकसित नहीं हमारी निज भाष।।(2)व्यक्तिगत क्षमता, सामूहिक क्षमता में; सार्वजनिक रूप में, सरकारी काम में;भ
13 दिसम्बर 2018
02 दिसम्बर 2018
भूमिका : हम देखते हैं, पाते हैं कि अलग अलग व्यक्ति अलग अलग ढ़ंग से, अपने अपने ढ़ंग से ही जीवन जी रहे हैं। बहुत मौटे तौर पर, हम इसको 3 श्रेणी में रख सकते हैं या 3 संभावनाओं के रूप में देख सकते हैं। हरेक के जीवन में हर प्रकार के क्षण आते हैं, उतार चढ़ाव आते हैं, पर कुल मि
02 दिसम्बर 2018
10 दिसम्बर 2018
कु
कुछ कुछ - किस्त पहलीमेरी ओर से प्रयास, एक लघु कदम, मेरे हिंदी के ज्ञान में सुधार हेतु। जो भी हिंदी के जानकार हैं, विद्वान हैं, उनसे निवेदन है, आग्रह है की वो आगे आयें। इस कार्य में योगदान, सहयोग, सहायता करें। इस उद्देश्य के साथ लेख प्रक
10 दिसम्बर 2018
06 दिसम्बर 2018
झगड़ा और दुश्मनीयदि आपस में कुछ या गंभीर;मनमुटाव, गलतफहमी, तकलीफ, घाटा आदि हो जाये;और बहुत गुस्सा आ जाये;तो भले ही छोटा झगड़ा कर लेना;पर दुश्मनी करना नहीं।। दुश्मनी कर लेने के बाद, पछताना ही शेष रहता है;फिर रिश्ता बचता ही नहीं; फिर से एक
06 दिसम्बर 2018
03 दिसम्बर 2018
क्
भूमिका : जब हम महान उद्देश्य लेकर चलते हैं, महान अभियान पर चलते हैं;बड़े महत्वपूर्ण कार्य को पूर्ण करने केलिए हम सब मिलजुल कर आगे बढ़ते हैं;तब हम उद्देश्य प्राप्ति केलिए संवाद करते हैं। तब हम वास्तविकता से जुड़ते जाने केलिए संवाद करते हैं;जीवन को अच्छा बनाने केलिए संवाद
03 दिसम्बर 2018
28 नवम्बर 2018
दो
- = + = दोराहा - = + =हर क्षण, नया क्षण, सदा साथ लाता है दोराहा हर क्षण, नया क्षण, सदा साथ लाता है दोराहा;भटकन से भरा, स्थायित्व से भरा होता है दोराहा। जिसे जो राह चलन
28 नवम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x