बेबसी

11 दिसम्बर 2018   |  शिशिर मधुकर   (62 बार पढ़ा जा चुका है)

बेबसी

यहाँ जिस चीज़ को चाहो, वही ना पास आती है

ज़िन्दगी खेल में अपने, फ़कत सबको नचाती है


जो अपने पास होता है, कदर उसकी नहीं होती

दूसरे की सफलता जाने क्यों, सबको लुभाती है


खिलाए गैरों के गुलशन, फक्र इसका मुझे हैं पर

अपनी उजड़ी हुईं बगिया देखो, मुझको रूलाती है


कभी थी रोशनी जिससे, शमा वो अब नहीं दिखती

एक लपट आग की बस, मेरे इस घर को जलाती है


मेरे इस दिल के सागर में, ज्वार तो अब भी आते हैं

मगर मधुकर की खुद की बेबसी, उसको दबाती है



अगला लेख: ये बारिश प्रेम की



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
22 दिसम्बर 2018
मुहब्बत, तूने दी मुझको, तभी मैं, हो गया तेरातू आई, मेरी बाहों में, मिटा है, कुछ तो अँधेराजब से, सूरज हुआ मद्धिम, बशर देखा, नहीं कोईमगर, उम्मीद थी दिल में, कभी फिर होगा, सवेराबहारें, जब भी आती हैं, शाख पे पात, उगते हैंचहकते, पंछियों का, फिर वहाँ, होता है बसेरादिल की, दुनिया में मैंने, अब तलक बस, हार
22 दिसम्बर 2018
22 दिसम्बर 2018
मुहब्बत, तूने दी मुझको, तभी मैं, हो गया तेरातू आई, मेरी बाहों में, मिटा है, कुछ तो अँधेराजब से, सूरज हुआ मद्धिम, बशर देखा, नहीं कोईमगर, उम्मीद थी दिल में, कभी फिर होगा, सवेराबहारें, जब भी आती हैं, शाख पे पात, उगते हैंचहकते, पंछियों का, फिर वहाँ, होता है बसेरादिल की, दुनिया में मैंने, अब तलक बस, हार
22 दिसम्बर 2018
04 दिसम्बर 2018
""""" """""मरा जा रहा हूँ (हास्य)""""" """' ************************* प्रिय मुझसे तेरा यूँ मुंह का फुलाना, नखरे दिखाना यूँ रूठ के सो जाना, गजब ढा रहा है, गजब ढा रहा है। न हँसना तनिक भी न सजना सवरना, न आँखें दिखाना न लड़ना झगड़ना, गजब ढा रहा है, गजब ढा रहा है। ओ तिरछी नजर से न मुझको रिझाना, न कसमों
04 दिसम्बर 2018
19 दिसम्बर 2018
ने
मुहब्बत हो गई तुमसे, करे क्या, दिल ये बेचारातन्हा बैठा है यादों में, मगर हिम्मत, नहीं हाराआस तो अब भी, जिंदा है, इस जीवन के, मेले मेंमिलन होगा यहाँ, अपना भी देखो, फिर से दोबारानहीं है भूख, इस तन की, तड़प है, मेरे सीने मेंमैं तो असली, पुजारी हूँ, नहीं हूँ , कोई आवारानिक
19 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
किस्मत के धोखे,ज़िन्दगी में, जब भी आते हैंकुछ भी करो, दिल को मगर, वो तो दुखाते हैंकभी सोचा ना था, यूँ ज़िन्दगी भी, रूठ जाएगीकुछ अपने , मुझे तो कोस के , हरदम सताते हैं मेरी कमजोरियां, मुझपे हमेशा, राज करती हैंसितारे भी, नई कोई राह ना, मुझको दिखाते हैं बिना चाहत के रिश्तों के, बोझ सब, सह नहीं सकते मेर
07 दिसम्बर 2018
14 दिसम्बर 2018
ये कैसा प्रेम है, मुझको नहीं तुम, याद करते होमैं कैसे मान लूँ, तुम मेरी छवि, सीने में धरते होदर्द तुमको अगर होता, तो चेहरे से, बयां होताजुदाई तुमको भाती है, तुम तो ऐसे, संवरते होबस एक सूरत है पहचानी, नहीं है, कोई भी नाता मेरे नज़दीक से, तुम तो फ़कत, ऐसे गुजरते होमुझे भी वो हुनर दे दो, फ़कत है पास, जो
14 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
लो वादा कर दिया मैंने तुम्हें ना याद करने कारकीबों को मिलेगा अब पूरा मौका संवरने कामेरी चिंता नहीं करना मौत मुझको ना आएगीमुझे मालूम है रस्ता हर एक ग़म से उबरने कासभी ये जानते हैं छोर पे उस कुछ ना पाओगेलेकिन मज़ा कितना है राहे उल्फ़त गुजरने काख्वाइशें तैरने की तो ज़माने भर की रहती हैंसफलता को मगर फन चा
07 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
किस्मत के धोखे,ज़िन्दगी में, जब भी आते हैंकुछ भी करो, दिल को मगर, वो तो दुखाते हैंकभी सोचा ना था, यूँ ज़िन्दगी भी, रूठ जाएगीकुछ अपने , मुझे तो कोस के , हरदम सताते हैं मेरी कमजोरियां, मुझपे हमेशा, राज करती हैंसितारे भी, नई कोई राह ना, मुझको दिखाते हैं बिना चाहत के रिश्तों के, बोझ सब, सह नहीं सकते मेर
07 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
लो वादा कर दिया मैंने तुम्हें ना याद करने कारकीबों को मिलेगा अब पूरा मौका संवरने कामेरी चिंता नहीं करना मौत मुझको ना आएगीमुझे मालूम है रस्ता हर एक ग़म से उबरने कासभी ये जानते हैं छोर पे उस कुछ ना पाओगेलेकिन मज़ा कितना है राहे उल्फ़त गुजरने काख्वाइशें तैरने की तो ज़माने भर की रहती हैंसफलता को मगर फन चा
07 दिसम्बर 2018
22 दिसम्बर 2018
आज, मेरी मुहब्बत की, तुम्हें ना कद्र, ज्यादा हैलगे, सब कुछ, भुलाने का, फ़कत, तेरा इरादा है अगर है, चाह इस मन में,, राह तो, बन ही जाएगी फिर तू, मजबूरियों का, क्यों यहाँ, ओढे लबादा हैबोझ, तन्हाइयों का, लो मैं फिर से, सर पे ले लूँगामैंने ग़म,
22 दिसम्बर 2018
27 नवम्बर 2018
Hindi poem -Nida Fazliकभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगेकभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगेवो बदन जब भी सजे कोई नया ख्वाब लगेएक चुप चाप सी लड़की, न कहानी न ग़ज़लयाद जो आये
27 नवम्बर 2018
12 दिसम्बर 2018
छवि एक दूजे की दिल में, जहाँ में जब समाती है तभी बदनॉ को आपस में, महक फूलों की आती है अगर है मैल इस दिल में, हर इक रिश्ता हैं बेमानीना जाने क्यों मगर दुनिया यहाँ, इनको निभाती हैएक उल्फ़त के प्यासे को, जहाँ मिलती है ये दौलतदरो दीवार उस घर की, उसे हर पल बुलाती हैबड़ा
12 दिसम्बर 2018
22 दिसम्बर 2018
आज, मेरी मुहब्बत की, तुम्हें ना कद्र, ज्यादा हैलगे, सब कुछ, भुलाने का, फ़कत, तेरा इरादा है अगर है, चाह इस मन में,, राह तो, बन ही जाएगी फिर तू, मजबूरियों का, क्यों यहाँ, ओढे लबादा हैबोझ, तन्हाइयों का, लो मैं फिर से, सर पे ले लूँगामैंने ग़म,
22 दिसम्बर 2018
10 दिसम्बर 2018
तमन्ना कब हुईं तुमको, मेरे नज़दीक आने कीमुझे बाहों में भर के सांसों में, मेरी समाने कीमैं जिसमें घिर गया ऐसे, जो सारा होश खो बैठाकहानी कुछ तो बतलाओ, मुझे अपने फसाने कीछोड़ दो तुम सभी चिंता, भगा दो दूर हर डर कोकसम मैंने तो खा ली है, तुमसे रिश्ता निभाने कीमुहब्बत कोई भी कर ले, मगर ये सच ना बदलेगाहुस्न
10 दिसम्बर 2018
07 दिसम्बर 2018
किस्मत के धोखे,ज़िन्दगी में, जब भी आते हैंकुछ भी करो, दिल को मगर, वो तो दुखाते हैंकभी सोचा ना था, यूँ ज़िन्दगी भी, रूठ जाएगीकुछ अपने , मुझे तो कोस के , हरदम सताते हैं मेरी कमजोरियां, मुझपे हमेशा, राज करती हैंसितारे भी, नई कोई राह ना, मुझको दिखाते हैं बिना चाहत के रिश्तों के, बोझ सब, सह नहीं सकते मेर
07 दिसम्बर 2018
06 दिसम्बर 2018
जब धुप लगी उसको तो , छाया कर दी उसने अपने ही सर का पल्लु उड़ा जब भुख लगी उसको ,तब पेट उसका भरा ,अपने हिस्से में आई आधी रोटी भी उसको खिला किन्तु - आश्चर्य हे या बिडम्ब्ना - इतने बड़े घर में, नहीं मिली उन दोनों को ,अपना हि सर ढकने की थोड़ी सि भी
06 दिसम्बर 2018
12 दिसम्बर 2018
छवि एक दूजे की दिल में, जहाँ में जब समाती है तभी बदनॉ को आपस में, महक फूलों की आती है अगर है मैल इस दिल में, हर इक रिश्ता हैं बेमानीना जाने क्यों मगर दुनिया यहाँ, इनको निभाती हैएक उल्फ़त के प्यासे को, जहाँ मिलती है ये दौलतदरो दीवार उस घर की, उसे हर पल बुलाती हैबड़ा
12 दिसम्बर 2018
13 दिसम्बर 2018
चाह फूलों की थी मुझको, मगर कांटों ने घेरा हैनज़ारा कौन सा कुदरत ने देखो, पर उकेरा है मुहब्बत की चाह रखना, गुनाह कोई नहीं होतामगर इस वक्त ने देखो, हर एक, सपना बिखेरा हैरात तन्हाई की देखो, अब तो इतनी हुई लम्बीना ही तो नींद आती है, ना ही, होता सवेरा हैखुशी की चाह में मैंने, कभी अपनों की ना मानीमेरे दिल
13 दिसम्बर 2018
13 दिसम्बर 2018
चाह फूलों की थी मुझको, मगर कांटों ने घेरा हैनज़ारा कौन सा कुदरत ने देखो, पर उकेरा है मुहब्बत की चाह रखना, गुनाह कोई नहीं होतामगर इस वक्त ने देखो, हर एक, सपना बिखेरा हैरात तन्हाई की देखो, अब तो इतनी हुई लम्बीना ही तो नींद आती है, ना ही, होता सवेरा हैखुशी की चाह में मैंने, कभी अपनों की ना मानीमेरे दिल
13 दिसम्बर 2018
14 दिसम्बर 2018
ये कैसा प्रेम है, मुझको नहीं तुम, याद करते होमैं कैसे मान लूँ, तुम मेरी छवि, सीने में धरते होदर्द तुमको अगर होता, तो चेहरे से, बयां होताजुदाई तुमको भाती है, तुम तो ऐसे, संवरते होबस एक सूरत है पहचानी, नहीं है, कोई भी नाता मेरे नज़दीक से, तुम तो फ़कत, ऐसे गुजरते होमुझे भी वो हुनर दे दो, फ़कत है पास, जो
14 दिसम्बर 2018
04 दिसम्बर 2018
ढूँढते हैं निशां तेरे, जब भी बगिया में आते हैंमुहब्बत के गीत भंवरे, यहाँ अब भी सुनाते हैं ज़रा मौसम यहाँ बदला, डालियाँ सज गई सारी बिना तेरे फूल खिलते हुए, पर ना लुभाते हैंमैं तो चुप हूँ मगर, झरने तो हरदम शोर करते हैंतड़प के आह भर, ये तो तुम्हें अ
04 दिसम्बर 2018
26 नवम्बर 2018
बहाना ढूंढते रहते हैं कोई रोने का - जावेद अख़्तर Poem in Hindi बहाना ढूंढ़ते रहते हैं कोई रोने का बहाना ढूंढ़ते रहते हैं कोई रोने का हमें ये शौक़ है क्या आस्तीन भिगोने का अगर पलक पर है मोती तो ये नहीं काफ़ी हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का जो फसल ख़्वाब की तैयार है तो ये जानो कि वक़्त आ गया फिर दर्द कोई
26 नवम्बर 2018
02 दिसम्बर 2018
मु
मैं नहीं कहता कि सर्वस वर दूंगा। कदमों में तेरे चाँद-सूरज डाल दूंगा। कल्पना जितनी किया होगा प्रिये, उससे अधिक 'कक्का' मैं तुमको प्यार दूंगा।
02 दिसम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x