रात तन्हाई की

13 दिसम्बर 2018   |  शिशिर मधुकर   (33 बार पढ़ा जा चुका है)

रात तन्हाई की  - शब्द (shabd.in)

चाह फूलों की थी मुझको, मगर कांटों ने घेरा है

नज़ारा कौन सा कुदरत ने देखो, पर उकेरा है


मुहब्बत की चाह रखना, गुनाह कोई नहीं होता

मगर इस वक्त ने देखो, हर एक, सपना बिखेरा है


रात तन्हाई की देखो, अब तो इतनी हुई लम्बी

ना ही तो नींद आती है, ना ही, होता सवेरा है


खुशी की चाह में मैंने, कभी अपनों की ना मानी

मेरे दिल में आज देखो, गमों का, बस बसेरा है


सफ़र पूरा किया सबने, इन्हीं राहों पे चल चल के

मगर मधुकर देख तुझको, मिला, कातिल लुटेरा है


शिशिर मधुकर

अगला लेख: ये बारिश प्रेम की



Tushar Thakur
13 दिसम्बर 2018

Thanks For sharing such a amazing article, i really love to read your content
regulearly.

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शिशिर मधुकर
13 दिसम्बर 2018

धन्यवाद ......

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