"कुंडलिया"

13 दिसम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (26 बार पढ़ा जा चुका है)

"कुंडलिया" - शब्द (shabd.in)

"कुंडलिया"


चादर ओढ़े सो रहा, कुदरत का खलिहान।

सूरज चंदा से कहे, ठिठुरा सकल जहान।।

ठिठुरा सकल जहान, गिरी है बर्फ चमन में।

घाँटी की पहचान, खलल मत डाल अमन में।।

कह गौतम कविराय, करो ऋतुओं का आदर।

शीत गर्म बरसात, सभी के घर में चादर।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "पद" कोयल कुहके पिय आजाओ, साजन तुम बिन कारी रैना,डाल पात बन छाओ।।



महातम मिश्रा
15 दिसम्बर 2018

बहुत बहुत धन्यवाद बहन, शुभाषीश

रेणु
13 दिसम्बर 2018

बहुत खूब भैया !! शीत का ये गीत यानि कुडलियांबहुत सुंदर सार्थक है | हार्दिक बधाई | सादर प्रणाम |

भीमसेन जोशी
13 दिसम्बर 2018

बहुत सुंदर

महातम मिश्रा
15 दिसम्बर 2018

हार्दिक धन्यवाद आदरणीय, स्वागतम

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