विश्वास, अविश्वास, और विज्ञान मार्ग गाथा ( मनन - 3 )

19 दिसम्बर 2018   |  उदय पूना   (62 बार पढ़ा जा चुका है)

विश्वास, अविश्वास, और विज्ञान मार्ग गाथा    ( मनन - 3 )

* विश्वास,अविश्वास,और विज्ञान मार्ग गाथा *

( मनन - 3 )


विश्वास-मार्ग,अविश्वास-मार्ग,और विज्ञान-मार्ग की यह गाथा है;

जानना है, क्या हैं इनको करने के आधार-मार्ग, और समझना इनकी गाथा है।01।


बिना जाने ही स्वीकार कर लेना *विश्वास* है;

निज अनुभव में आधार नहीं है कि स्वीकार किया जाये;

फिर भी बिना आधार के ही स्वीकार कर के चलने लगना *विश्वास* है।


और, बिना जाने ही नकार देना *अविश्वास* है;

निज अनुभव में आधार नहीं है कि नकार दिया जाये,

फिर भी बिना आधार के ही नकारते हुये चलने लगना *अविश्वास* है।02-i।


दोनों में ही सचाई का द्वार बंद करते हैं हम;

और खोज करने का द्वार भी बंद करते हैं हम।

गलती से नया मिल जाये तो अलग बात है;

पर यैसा नहीं पहचानेंगे हम, इसे उपलब्धि के रूप में देखेंगे;

और अपनी मान्यता का प्रसाद मानेंगे हम।02-ii।


कुछ नया करने का मार्ग बंद है;

उन्नति करने का भी मार्ग बंद है।

संक्षेप में इतना ही सार है;

दो पहलू हैं पर सिक्का एक है।02-iii।


प्रगति का मार्ग खुलता गया वैज्ञानिक-सोच से;

नया करने का मार्ग खुलता गया वैज्ञानिक-सोच से।

वैज्ञानिक-सोच ने जानने का मार्ग अपनाया, जो मार्ग प्रमाणित किया जा सके उस पर आगे बढे;

जो कार्य पहले असंभव थे, संभव होने लगे;

तथ्य को लेकर चले तो प्रगति के द्वार पर द्वार खुलने लगे।04।


zindagi


*विज्ञान-मार्ग*, मतलब विज्ञान करने का आधार मार्ग, की सफलता को देखकर;

क्या हम जीवन के दूसरे पहलुओं पर पुनर्विचार को तैयार नहीं ??

क्या हम *विज्ञान-मार्ग* पर अभी ही चलने को तैयार नहीं ??


क्या हमें वैज्ञानिक-सोच की उपलब्धियां दिखती नहीं ??

क्या यह हमें झकझोरने को पर्याप्त नहीं ??

क्या अभी भी हमारी नींद खुली नहीं ??

कितना जड़त्व (Inertia) है जो टूटेगा नहीं ??


न विशवास करना है, न अविश्वास करना है;

जानने का प्रयास करते जाना है;

जो जो प्रमाणित हो सके, सिद्ध हो सके उसे स्वीकारना है;

जो जो खंडित हो जाये उसे छोड़ना है;

*विज्ञान-मार्ग* से क्रांति होने का क्रम चलता जायेगा;

जीवन में अच्छे अच्छे बदलाव होने का क्रम चलता जायेगा।05।


जिसका ज्ञान नहीं, अनुभव नहीं, उससे जुडी कोई धारणा बनानी नहीं;

बिना जाने, न सहमत होना है, न असहमत होना है;

न स्वीकार करना है, न अस्वीकार करना है।


सभी तरह के अंध-विश्वासों से मुक्त होना है;

विश्वास और अविश्वास करके चलने से मुक्त होना है।


जानते जाना, जानते जाने का ही मार्ग अपनाना है;

और जीवन में क्रांति का क्रम चलाते जाना है।06।


उदय पूना,

92847 37432,

अगला लेख: मां पहले पत्नी थी; पत्नी रूप में कितना था सम्मान ??



उदय पूना
19 दिसम्बर 2018

मनन धारा के अंतर्गत तीन रचनाएं प्रकाशित कीं हैं; तीनों रचनाओं को एक साथ लेकर चलने से इसका सन्देश अधिक स्पष्ट होगा;
हमें ज्ञान मिले और हम सर्वांगीण प्रगति की ओर बढ़ते जाएं;
प्रणाम

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