राख...

22 दिसम्बर 2018   |  Harshad kalidas molishree   (38 बार पढ़ा जा चुका है)

राख...  - शब्द (shabd.in)

राख... कैसे रिश्ते ये... कैसे ये नाते है... अपना ही खून हमे कहा अपनाते है... प्यार कहो या कहो वफ़ा... सबकुछ तो सिर्फ बातें है... रिशतें कहो या कहो अपने... सबकुछ तो सिर्फ नाते है... बातें लोग भूल जाते है... नाते है टूट जाते है... कोनसी कसमें कोनसे वादें... यहां अपने पीछे छूट जाते है... कितना भी कहलो अपना किसीको... कोई ना अपना मानेगा... आग लगाये सारी दुनिया तो क्या... एक दिन मरने पर अपना खून ही तुझे जलाएगा.... जान ले सच है क्या दुनिया का... कोन तुझे अपनाएगा... रिस्तेें झुटे, वादे झुटे... झुटे है नाते यहां... अपनो से पीछा तू छुड़ाए... ये अपना ही बचाएगा... मर गया जो कल तू, तुझे यही आग लगाएगा... यही है जीवन जी ले इसको... भाग के तू कहा जाएगा... कसमे वादें प्यार वफ़ा सब.... साथ ही रह जाएगा... भूल के सब कुछ जिले पल ये.... सबकुछ तो राख होजाएगा....

अगला लेख: बाबा तेरी चिरैया...



उदय पूना
22 दिसम्बर 2018

सुन्दर, मृत्यु एक सचाई है, बधाई, प्रणाम,

Harshad kalidas molishree
23 दिसम्बर 2018

धन्यवाद

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
13 दिसम्बर 2018
धु
16 दिसम्बर 2018
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x