वादा

22 दिसम्बर 2018   |  शिशिर मधुकर   (30 बार पढ़ा जा चुका है)

वादा - शब्द (shabd.in)

आज, मेरी मुहब्बत की, तुम्हें ना कद्र, ज्यादा है

लगे, सब कुछ, भुलाने का, फ़कत, तेरा इरादा है

अगर है, चाह इस मन में,, राह तो, बन ही जाएगी

फिर तू, मजबूरियों का, क्यों यहाँ, ओढे लबादा है


बोझ, तन्हाइयों का, लो मैं फिर से, सर पे ले लूँगा

मैंने ग़म, ज़िन्दगी में ना कभी, औरों पे, लादा है


जिस घड़ी, दिल दिया मैंने, ख़बर ना, पास थी मेरे

मुझे, जिसने लुभाया, बस तेरा एक रूप, सादा है

दहशतें, छोड़ दो सारी, ना मन पे, बोझ तुम रक्खो

कभी, रुसवाई ना होगी, तुझसे, मधुकर का वादा है



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