चुनाव चिन्ह जूता।

04 जनवरी 2019   |  जानू नागर   (111 बार पढ़ा जा चुका है)

चुनाव चिन्ह जूता।


लोकलाज सब त्याग, जूता निशान बनाया।

झाड़ू से सफाई कर, बाद मे जूता दीना।

पढ़ लिख कर मति बौराई, कौन इन्हे समझाए?

लोक सभा चुनाव से पहले जूता निशान बनाए।

हरि बैल,खेत-किसान, खत का निशान मिटाया।

वीर सपूतो की फाँसी वाली रस्सी को ठुकराया।

उन वीरांगनाओ को भूल गए जिसने खट्टे दाँत किये।

दिल्ली को बना के चमचम, पूरे देश मे जूता बाट दिए।

अब निशान घाँघरा-चोली रब्बा-राम इनको बचाए।

बस चले चुनाव आयोग का तो इनको भी बेच खाए।

बना जूता काँटो मे चलने के लिए, कौन फूल अब इनमे बरसाए?

पहले बना जूतो का माला कौन इन्हे पहनाए?

वाह रे हरि! कैसे पढे लिखो का ध्यान ज्ञान सब छीना?

सुख-चैन छीन किसान का, गन्ना-गुड, आलू खेत मे सड़ाया।

अगला लेख: छोड़ेंगे न साथ।



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
04 जनवरी 2019
पा
पानी...अब न खोदो कुआँ न गाड़ों हैंड पम्प, न लो नाम समरसेबल का।नदी, नहर, सागर हो रहे प्रदूषित न नाम लो तालाबो का।बहने दो पानी को पाईप लाइनों मे, न नाम लो टैंकरो का। छत मे रखी टंकियाँ हो रही हैं बदरंग, न नाम लो आरो का।दूध से महंगा बिक रहा हैं, बंद बोतलों मे बिसलेरी का पानी।सरकार प्लांट लगवाए यह कहकर कि
04 जनवरी 2019
09 जनवरी 2019
अब अपने मनसे जीव।आटा-लाटा ख़ाके, ताजा माठा पीव।देख पराई कमाई, मत ललचाव जीव।हो घर मे जो, उसको खा-पी के जीव।चाईना ने तिब्बतके बॉर्डर मे मिसाईल तान दी।1965 मे सहस्रसिपाहियो ने अपनी बलिदानी दी ।जो घर मे होघीव, देख उसे शकुनसी जीव।देख राजा-नेताओके झगड़े मे, मत जलाओअपना जीव।छोड़-छाड़ जातीधर्म आरक्षण का वहम खुद
09 जनवरी 2019
31 दिसम्बर 2018
सब कुछ लागे नया-नया ।दे-दो जो देना चाहते हो नये साल मे,यह नया साल हर ठंडी मे ही आता हैं।भारतीय रीत रिवाज मे नया साल हम तब मनाते हैं जब हमारे देश का किसान व जवान दोनों खुश होते हैं। गाँव के खुले मैदान व खेतो मे बहन बेटियों की शादियाँ हो रही होती हैं। पेड़ों की छाव मे बिस्तर लगे होते हैं। कुआँ का ठंडा
31 दिसम्बर 2018
31 दिसम्बर 2018
सविता अपने बचपन की सारी खुशीयों को अपने माँबाप के साथ नही बाँट पाई। गाँव को समझ नही पाई, चाँद तारों की छाव में उनकीठंडक को भाँप नही पाई, चन्द सवाल ही पूछ पाती कि चंदा मामा कितनीदूर है? गोरी कलाइयों में बंधे दूधिया तागे कमजोर पड़ गए थे| पैरो में पड़ी पाज़ेब की खनक छनक से अपने नानी नाना के दिल को मोहने ल
31 दिसम्बर 2018
31 दिसम्बर 2018
बा
बात और थोड़े दिन की।चुरा लो और क्या चुराओगे?पूछेगीं नज़रे,तो क्या बताओगे?जुबान चुप होगी, होठ सिल जाएंगे।मयते कब्र मे दफ़न हो जाएंगी।अब वक्त शुरू हुआ हैं, विलय का।बैंक ही नहीं सबकुछ विलय हो जाएगा।चलता रहा यू ही कारवां, आने वाली पीढ़ियाँ भी विलय हो जाएंगी।खोजते रहना जाति, धर्म, जब इंसानियत ही विलय हो जाएग
31 दिसम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x