चुनाव चिन्ह जूता।

04 जनवरी 2019   |  जानू नागर   (94 बार पढ़ा जा चुका है)

चुनाव चिन्ह जूता।


लोकलाज सब त्याग, जूता निशान बनाया।

झाड़ू से सफाई कर, बाद मे जूता दीना।

पढ़ लिख कर मति बौराई, कौन इन्हे समझाए?

लोक सभा चुनाव से पहले जूता निशान बनाए।

हरि बैल,खेत-किसान, खत का निशान मिटाया।

वीर सपूतो की फाँसी वाली रस्सी को ठुकराया।

उन वीरांगनाओ को भूल गए जिसने खट्टे दाँत किये।

दिल्ली को बना के चमचम, पूरे देश मे जूता बाट दिए।

अब निशान घाँघरा-चोली रब्बा-राम इनको बचाए।

बस चले चुनाव आयोग का तो इनको भी बेच खाए।

बना जूता काँटो मे चलने के लिए, कौन फूल अब इनमे बरसाए?

पहले बना जूतो का माला कौन इन्हे पहनाए?

वाह रे हरि! कैसे पढे लिखो का ध्यान ज्ञान सब छीना?

सुख-चैन छीन किसान का, गन्ना-गुड, आलू खेत मे सड़ाया।

अगला लेख: छोड़ेंगे न साथ।



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
31 दिसम्बर 2018
2013 savita doosara bhag होली के रंग जीवन के संग। सर में पड़ा सूखारंग, नहाते वक्त ही बताता है कि मै कितना चटकीला हूँ। पानी की धार के साथ शरीरके हर अंग मे अपनी दस्तक की खबर के तार को बिछाता। उस समय यह अनुमान लगाना मुश्किलहो जाता है कि यह किसका रंग हैं? फाल्गुन का महिना आधा होचला था। चटकीले रंग फीके हो
31 दिसम्बर 2018
18 जनवरी 2019
सच रो रहाशिक्षित प्रशिक्षितधरना और जेल मे।नेता अभिनेतासंसद और बुलट ट्रेन मे।एमेड बीएडतले पकोड़ा खेतवा की मेड़ मे।योगी संत महत्मासेलफ़ी लेवे गंगा की धार मे।बोले जो हककी बात वह भी जिला कारागार मे।बोले जो झूठमूठ वह बैठे सरकारी जैगुआर मे।कर ज़ोर जबरदसतीन्याय को खा जाएंगे।की अगर हककी बात तो लाठी डंडा खा जाएं
18 जनवरी 2019
08 जनवरी 2019
फर्क सतयुग मे औरत यमराज से अपने पति को जीत लिया।त्रेता युग मे औरत पुरुष एक समान थे।अहिल्या बहाल हुई। पर अंत मे सीता हरी गई। द्वापर मे औरतों पर उंगली उठने लगी राधा ने प्यार किया, मीरा ने प्रेम किया। रुकमनी ने विवाह किया।अंत मे द्रोपदी का चीर हरन हुआ ।कलयुग मे सभी नारी-नारी चिल्ला रहे हैं, नारी को मज
08 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
सबने सुना हैं दुनियाँ का सबसे अमीर आदमी यह हैं यहाँ का हैं उसकी इतनी संपत्ति हैं।हा शरीर से कमजोर आदमी को मत बतान। उसमे एक अनोखी कला होती हैं।
18 जनवरी 2019
04 जनवरी 2019
पा
पानी...अब न खोदो कुआँ न गाड़ों हैंड पम्प, न लो नाम समरसेबल का।नदी, नहर, सागर हो रहे प्रदूषित न नाम लो तालाबो का।बहने दो पानी को पाईप लाइनों मे, न नाम लो टैंकरो का। छत मे रखी टंकियाँ हो रही हैं बदरंग, न नाम लो आरो का।दूध से महंगा बिक रहा हैं, बंद बोतलों मे बिसलेरी का पानी।सरकार प्लांट लगवाए यह कहकर कि
04 जनवरी 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x