"मुक्तक"

11 जनवरी 2019   |  महातम मिश्रा   (83 बार पढ़ा जा चुका है)

"मुक्तक"


मंदिर रहा सारथी, अर्थ लगाते लोग।

क्या लिख्खा है बात में, होगा कोई ढोंग।

कौन पढ़े किताब को, सबके अपने रूप-

कोई कहता सार है, कोई कहता रोग।।-1


मंदिर परम राम का, सब करते सम्मान।

पढ़ना लिखना बाँचना, रखना सुंदर ज्ञान।

मत पढ़ना मेरे सनम, पहरा स्वारथ गीत-

चहरों पर आती नहीं, बे-मौसम मुस्कान।।-2


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "चौपाई मुक्तक" वन-वन घूमे थे रघुराई, जब रावण ने सिया चुराई। रावण वधकर कोशल राई, जहँ मंदिर तहँ मस्जिद पाई।



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
19 जनवरी 2019
"कुंडलिया"लेकर दीपक हाथ में, कर सोलह शृंगार।नृत्य नैन सुधि साधना, रूपक रूप निहार।।रूपक रूप निहार, नारि नख-शिख जिय गहना।पहने कंगन हार, लिलार सजाती बहना।।कह गौतम कविराय, परीक्षा पूरक देकर।यौवन के अनुरूप, सजी सुंदरता लेकर।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
19 जनवरी 2019
29 दिसम्बर 2018
"
सवैया "मदिरा" मापनी -- 211/211/211/211/211/211/211/2"छंद मदिरा सवैया"नाचत गावत हौ गलियाँ प्रभु गाय चरावत गोकुल में।रास रचावत हौ वन में क्यों धूल उड़ावत गोधुल में।।जन्म लियो वसुदेव घरे मटकी लुढ़कावत हौ तुल में।मोहन मोह मयी मुरली मन की ममता महके मुल में।।-1आपुहिं आपु गयो तुम माधव धाम बसा कर छोड़ गए।का ग
29 दिसम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
11 जनवरी 2019
27 दिसम्बर 2018
"
28 दिसम्बर 2018
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x