आसान नहीं था वो दिन मेरे लिए

13 जनवरी 2019   |  आयेशा मेहता   (118 बार पढ़ा जा चुका है)

आसान नहीं था वो दिन मेरे लिए

उस दिन चूड़ियों से मैंअपने हाथ की नब्ज नहीं काटी , और न ही स्लीपिंग पिल्स का एक्स्ट्रा डोज लेकर ,

गहरी नींद में हमेशा के लिए सो गयी थी ,

जैसा की फिल्मों में अक्सर नायिका करती है ा

आसान नहीं था वो दिन मेरे लिए ,

टूटे दिल के तमाम टुकड़े को समेटकर ,

बनावटी मुस्कुराहट के पूछे विसर्जित करी थी ,

एक सैलाब सा आया हुआ था अंदर ,

पर आँखों से बूँद का एक कतरा भी नहीं निकला ,

एक चुप्पी चीख रही थी हृदय में कहीं ,

पर होठों से उफ़ तक नहीं निकला ,

एक तरफ मेरी जान मुझसे जुदा हो रही थी ,

तो दूसरी तरफ मैं जीने की रस्म निभा रही थी,

जाते जाते उसने यही तो कहा था मुझसे ,

''कहीं भी रहो पर ऐसे मत जीना की ऊँगली मुझ पर उठे''

हाँ उसका यही आखिरी लब्ज तो मेरी साँसों को थमने नहीं दिया ा

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अलोक सिन्हा
23 जनवरी 2019

अच्छी रचना है |

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