"कुंडलिया"

19 जनवरी 2019   |  महातम मिश्रा   (64 बार पढ़ा जा चुका है)

"कुंडलिया"


"कुंडलिया"


लेकर दीपक हाथ में, कर सोलह शृंगार।

नृत्य नैन सुधि साधना, रूपक रूप निहार।।

रूपक रूप निहार, नारि नख-शिख जिय गहना।

पहने कंगन हार, लिलार सजाती बहना।।

कह गौतम कविराय, परीक्षा पूरक देकर।

यौवन के अनुरूप, सजी सुंदरता लेकर।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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