"चौपाई मुक्तक" वन-वन घूमे थे रघुराई, जब रावण ने सिया चुराई। रावण वधकर कोशल राई, जहँ मंदिर तहँ मस्जिद पाई।

19 जनवरी 2019   |  महातम मिश्रा   (45 बार पढ़ा जा चुका है)

"चौपाई मुक्तक"


वन-वन घूमे थे रघुराई, जब रावण ने सिया चुराई।

रावण वधकर कोशल राई, जहँ मंदिर तहँ मस्जिद पाई।

आज न्याय माँगत रघुवीरा, सुनो लखन वन वृक्ष अधिरा-

कैकेई ममता विसराई, अवध नगर हति कागा जाई।।-1


अग्नि परीक्षा सिया हजारों, मड़ई वन श्रीराम सहारो।

सुनो सपूतों राम सहारो, जस गंगा तस तपसी तारो।

विटप लगाओ हे मन कुटिला, वन नहिं बाग न साधू कपिला-

हनूमान के पथ अनुसारो, मातु अशीष अमर युग चारो।।-2


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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