नारी तू नारी हैं

27 जनवरी 2019   |  गौरीगन गुप्ता   (70 बार पढ़ा जा चुका है)

नव रसो की खान,आशा है, अभिलाषा है त्यागमयी ममतामयी जीवन की परिभाषा है श्रद्धासमर्पण दृश्यविहीन सी माया की परछाई ईश्वर की भरपाई करने तू जगत में आई बहुतेरे रूप तेरे बहुकार्यो में पारंगत तू शाश्वत अनुराग से भरी दुआये लुटाती तू बिना जताएअंतर्मन को पढ, चिन्ता भय मुक्त करती सौभाग्यवती भव मे हाथ उठे, सदैव आशीर्वाद लुटाती सागर सी गहराई समाई , विशालकाय पर्वत सी अथाह शक्ति से लडती, ममत्व का झरना बहाती अन्नपूर्णा, स्वयं में महाकाव्य समाया,एक फरियाद हो जादुई आत्मा की तरह दुखदर्द मिटाने वाली हकीम हो मातृत्व, बात्सल्य, करूणा की त्रिवेणी का संगम , बेमिसाल दास्तां तेरी, बारंबार तुझको करते नमन।

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