वीर सिपाही

16 फरवरी 2019   |  आयेशा मेहता   (81 बार पढ़ा जा चुका है)

वीर सिपाही

हो वीरता का संचार तुम ,

इस मातृभूमि का लाल तुम ,

तुम गूंजते हो खुले आसमान में ,

तुम दहाड़ते हो युद्ध के मैदान में ,

कभी रुकते नहीं कदम तुम्हारे ,

थकते नहीं बदन तुम्हारे ,

हो क्रांति का एक मिशाल तुम ,

शेरनी माँ का शेर औलाद तुम ,

जो सर कटाए देश के खातिर ,

मातृभूमि ही जिसकी जान हो ,

सलाम है तुझको ऐ वीर सिपाही ,

तुम्ही इस देश के अभिमान हो ,

गोलियाँ खाकर भी फौलादी वक्ष पर ,

एक उफ़ न तेरे मुँह से निकलता ,

बारूद में दिन -रात खेलकर ,

तू मातृभूमि की रक्षा करता ,

ऐ मेरे देश के जावाज रक्षक ,

भारतवासी हमेशा तेरा कर्जदार रहेगा ,

सलाम करता आकाश तुझे ,

देश तुझपर गुमान करता ,

देखो हिमालय पहाड़ भी ,

तनकर तुझे सलाम करता ा

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अलोक सिन्हा
05 मार्च 2019

अच्छी पंक्तियाँ हैं |

रेणु
02 मार्च 2019

वीर जवान की सुंदर अभ्यर्थना |

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