लौटा माटी का लाल

16 फरवरी 2019   |  रेणु   (65 बार पढ़ा जा चुका है)

लौटा माटी का लाल  - शब्द (shabd.in)

गूंजी मातमी धुन
लुटा यौवन
तन सजा तिरंगा
लौटा माटी का लाल
माटी में मिल जाने को !


इतराया था एक दिन
तन पहन के खाकी
चला वतन की राह
ना कोई चाह थी बाकी
चुकाने दूध का कर्ज़
पिताका मान बढाने को !
लौटा माटी का लाल
माटी में मिल जाने को !!

रचा चक्रव्यूह
शिखंडी शत्रु ने
छुपके घात लगाई
कुटिल चली चाल
मांद जा जान छिपाई
पल में देता चीर
ना आया आँख मिलाने को !
लौटा माटी का लाल
माटी में मिल जाने को !!

उमड़ा जन सैलाब -
विदा की आई बेला ,
हिया विदीर्ण महतारी आज

आंगन ये कैसा मेला ?
सुत सोया आँखें मूंद
जगा ना धीर बंधाने को;

लौटा माटी का लाल -
माटी में मिल जाने को !!!!!!!



पुलवामा के वीर शहीदों को अश्रुपूरित कोटि नमन !!!!!!!!!
स्वरचित -- रेणु--
------------------------------------------------

अगला लेख: हार्दिक अभिनन्दन !



अलोक सिन्हा
25 फरवरी 2019

अच्छी रचना है |

रेणु
02 मार्च 2019

सादर आभार आदरणीय आलोक जी

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
04 फरवरी 2019
अब तुझको मेरे साथ की कोई ना आस हैतेरा काम तो निकल गया शक्ति भी पास हैतेरे आँसुओं के फेर में मैं फिर से लुट गया इक ये अदा तो हुस्न की सदियों से खास है उल्फ़त की राह में मिला मुझको फ़कत फरेबइसकी डगर न जाने क्यों आती ना रास हैमुझको सफ़र में ना
04 फरवरी 2019
04 फरवरी 2019
पाकिस्तान में लड़कियों के लिए कई कड़े नियम होते हैं। वहां रहने वाले लोगों को इन नियमों को मानना भी होता है, लेकिन कहते हैं ना कि जहां चाह वहां राह। एक ऐसा ही वाक्या पाकिस्तान में घटा है जिसके चलते वहां पर पहली बार कोई हिंदू महिला जज बनी हैं। बता दें सुमन पवन बोदानी नाम की ये महिला पहली महिला सिविल ज
04 फरवरी 2019
01 मार्च 2019
वीर अभिनन्दन ! हार्दिक अभिनन्दन ! तुम्हारे शौर्य को कोटि वन्दन ! पुलकित , गर्वित माँ भारती - तुम्हारे निर्भीक पराक्रम से , मृत्यु - भय से हुए ना विचलित - ना चूके संयम से ;सिंह पुत्र तुम जननी के सहमा शत्रु नराधम !! श
01 मार्च 2019
05 फरवरी 2019
तुलसी दास कहते हैं- 'भाव-अभाव, अनख-आलसहुं, नाम जपत मंगल दिषी होहुं।' भाव से, अभाव से, बेमन से या आलस से, और तो और, यदि भूल से भी भगवान के नाम का स्मरण कर लो तो दसों दिशाओं में मंगल होता है। भगवान स्वयं कहते हैं, भाव का भूखा हूं मैं, और भाव ही इक सार है, भाव बिन सर्वस्व भी दें तो मुझे स्वीकार नहीं! ऐ
05 फरवरी 2019
24 फरवरी 2019
मैं ना तो हिन्दू हूँ ना ही हिंदुत्व में विश्वास रखता हूँ. मैं सनातनी हूँ और सनातन धर्म का पालन करता हूँ. सनातन धर्म जो सृष्टि के आरम्भ से हैं और सृष्टि के अंत तक रहेगा. गर्व से कहो कि मैं सनातनी हूँ. सनातन में सब कुछ समा जात
24 फरवरी 2019
02 फरवरी 2019
चाँद हंसिया रे ! सुन जरा !ये कैसी लगन जगाई तूने ? कब के जिसे भूले बैठे थे -फिर उसकी याद दिलाई तूने !!गगन में अकेला बेबस सा - तारों से बतियाता तू नीरवता के सागर में - पल - पल गोते खाता तू ;कौन खोट करनी में आया ? \ये बात न
02 फरवरी 2019
04 फरवरी 2019
बड़े नज़दीक जीवन में अगर कोई भी आता हैसामने वो अगर आए तो मन थोड़ा लजाता हैसांस जोरों से चलती है नज़र उठती नहीं ऊपरहाल कुछ और होता है ना जो चेहरा दिखाता हैआज वो दूर है मुझसे मैं भी मशगूल हूँ खुद में मगर गुजरे हुए पल तो ये मनवा ना भूलाता हैमेरी मजबूरियां समझो और इस सच को पहचानोविछोह तुझसे मुझे अब भी अके
04 फरवरी 2019
06 फरवरी 2019
त्याग, संघर्षपूर्ण जीवन, नि: स्वार्थ सेवा और निष्काम भक्तिरामायण और रामचरित मानस में भगवान श्रीराम की वनयात्रा में माता शबरी का प्रसंग सर्वाधिक भावपूर्ण है। भक्त और भगवान के मिलन की इस कथा को गाते सुनाते बड़े-बड़े पंडित और विद्वान भाव विभोर हो जाते हैं। माता शबरी का त्याग और संघर्षपूर्ण जीवन, नि: स्व
06 फरवरी 2019
06 फरवरी 2019
तेरी आवाज़ को सुनना सुकूँ एक रूह को देता हैशिकायत है मगर मुझको ख़बर तू क्यों ना लेता हैप्यार बरसेगा जो तेरा चैन कुछ आ ही जाएगामेरे जीवन के आँगन में बिछा बस सूखा रेता हैसमय के साथ मेरी नाव तो बस बह रही है अबलाख कोशिश करी मांझी मगर ना इसको खेता हैप्यार को बाँटता है जो वही तो प्यार पाएगाबिना कारण ही तू
06 फरवरी 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
04 फरवरी 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x