मुझसे ही मुझको ढूँढ़कर मुझसे मिला रहा है वो

17 फरवरी 2019   |  आयेशा मेहता   (58 बार पढ़ा जा चुका है)

मुझसे ही मुझको ढूँढ़कर मुझसे मिला रहा है वो  - शब्द (shabd.in)

स्याही में कोई बेजुवान साया घुला है जैसे ,

एक मासूम चेहरा अक्षरों से तक रहा है मुझको ,

मेरे बंद मुट्ठी में तस्वीर जिसका भी हो ,

अपने नाम में मेरा नाम ढूँढ रहा है वो ा

इश्क का हमसफ़र कभी बदलता नहीं ,

धडकनों पर लिखा चेहरा कभी मिटता नहीं ,

जानता है फिर भी मेरा दर्द माँग रहा है वो ा

इश्क में बदनाम करके भी मुझको,एक बूंद इश्क दिए नहीं वो ,

वर्षों से जो मोहब्बत उनसे माँगती रही मैं ,

वही चाहत मुझपे लुटाने को तरस रहा है वो ा

हर घड़ी हर एक चेहरा में उनका चेहरा मैं ढूँढती रही ,

उनको पाने की तमन्ना में खुद को ही खो गए हम कही,

मुझसे ही मुझको ढूँढ़कर मुझसे मिला रहे हैं वो ा

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