"दोहावली" नमन शहीदों को नमन, नमन हिंद के वीर। हर हालत से निपटते, आप कुशल रणधीर।।

22 फरवरी 2019   |  महातम मिश्रा   (45 बार पढ़ा जा चुका है)

"दोहावली"


नमन शहीदों को नमन, नमन हिंद के वीर।

हर हालत से निपटते, आप कुशल रणधीर।।-1

नतमस्तक यह देश है, आप दिए बलिदान।

गर्व युगों से आप पर, करता भारत मान।।-2

रुदन करे मेरी कलम, नयन हो रहे लाल।

शब्द नहीं निःशब्द हूँ, कौन वीर का काल।।-3

राजनयिक जी सभा में, करते हो संग्राम।

जाओ सीमा पर लड़ो, खुश होगी आवाम।।-4

वोट माँगने के लिए, अब मत आना गाँव।

देखो बिन अपराध के, उजड़ रहे हैं छाँव।।-5

बेमानी होगी बहुत, गर हम चूके आज।

बिना बताए टूटिये, जैसे टूटे बाज।।-6

दुश्मन जब शैतान हो, तब मत बाँचो नीति।

खंडित-रंजित सिर करो, यही सत्य की रीति।।-7

बहुत ले लिया प्रण सपथ, बहुत किया व्यवहार।

पाक पातकी देश है, हो उसका उपचार।।-8

कई बार वादा हुआ, कई बार संकल्प।

बदला लेंगे पाक से, मिल तो जाय विकल्प।।-9

बहुत कष्ट की बात है, होते वीर शहीद।

बिना युद्ध की आहुती, देते लखन हमीद।।-10

देखो उस घर को तनिक, जहाँ पार्थिव देह।

रिश्ते लिपट मसोसते, उजड़ा विधवा गेह।।-11

सुन-सुन कर छाती फटी, हृदय हुआ बेचैन।

री सीमा कैसी खबर, बाँच रहे हैं नैन।।-12

वीर जवानों की दशा, किसने किया खराब।

किसने आँखों में भरा, बिन दरिया के आब।।-13

बूँद-बूँद में तपिश है, कण-कण में भूचाल।

लगता फटने को विकल, ज्वालामुखी मलाल।।-14

एक घाव सूखा नहीं, दूजा है तैयार।

रे भारत के वीर अब, जा घर में घुस मार।।-15

नहीं सुधरते हैं कभी, जल्लादों के गाँव।

कहाँ पाक के पास है, नीयत नेकी छाँव।।-16

पाक न खुद का हो सका, मिली उसे हर छूट

बस इतना वह जानता, मार-काट अरु लूट।।-17

कीचड़ में जो जीव है, उसे न लाभ न हानि।

जीता है पी गंदगी, मरता है गति जानि।।-18

रेंग रहा है पातकी, कहता यही नसीब।

भार धरा का बन गया, पाकिस्तान अजीब।।-19

मानव का चोला लिए, घूम रहा हैवान।

कहता ईश्वर की कसम, मैं भी हूँ इंसान।।-20


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी


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