संग दिल

25 फरवरी 2019   |  मंजू गीत   (32 बार पढ़ा जा चुका है)

आपकी खामोश निगाहों ने फिर समझाया। आपकी तनहाईयों से फिर मिलवाया। बहुत कुछ था कहने को, फिर ना कोई तुमने अपना पाया। साथी और शक दोनों साथ हों तो शक को मिटाने में खुद को टूटा पाया। सब कुछ है जो तुम्हारे लिए, उसकी चुप्पी में खुद को तिलमिलायां। लगता है फिर तुमने अपनी जिंदगी को है समझाया। अकेला पन ले ना जाए अवसाद में, बस यही डर उभर आया। यूं ना तुम खुद को गंवाना, वो समझ रहा है तुम्हें, बस धीर धरना। अधीर हो मनवा तो गुनगुनाना। समझ की डोर से न जख्म खाना, प्रेम है आत्मा का, ना तुम घबराना। खुद को उसमें देख पाओगे, जब जीवन का वक्त साथ बिताओगें। आंखों का नमकीन पानी, लार के साथ पी जाते हो। कहों ना तुम कुछ भी, पर एक बात कहें..... सब होते हुए भी आप अकेले, तन्हा नजर आते हों। काफी दिन से आपकी खामोशियां बाहर सांस ले रही हैं। हार, घर, खुद,खुदा लिखने से सदायें लौट कर नहीं आतीं। दुनिया की कहानियों, किस्सों, कहावतों से खुद को समझाना ही अब जीवन हों गया। शांत दिवारों, किनारों के साथ यादों का बसेरा हों गया। आपकी खामोश नजरें बयां करती हैं, तेरे अंतर्मन की उल्फत को, साथ को तरसती, तेरी चाहत को। अपने साथी में देखती, खुद की छवि को। ग़म ना कर सब होगा, आज नहीं तो कल होगा। आपका हमराह, संग दिल, साथी आपकी हर सोच में साथ और पास होगा।

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