मेरा सहारा

27 फरवरी 2019   |  शिशिर मधुकर   (29 बार पढ़ा जा चुका है)

मेरा सहारा - शब्द (shabd.in)

तेरी आवाज़ ही अब तो बनी मेरा सहारा है

हजारों फूल खिलते हैं तूने जब भी पुकारा है


तू मेरी सांस बनके इस तरह जीवन में छाया है

तेरे बिन ज़िन्दगी का अब नहीं होता गुजारा है


मुझे कड़वे सचों ने ज़िन्दगी के तोड़ डाला था

मेरी उजड़ी सी हस्ती को फ़कत तूने निखारा है


बसी हूँ जब से पलकों में वहीं महफूज़ हूँ हरदम

ना पल भर को कभी तूने मुझे नीचे उतारा है


जमीं में थी दफन मैं तो फ़कत एक बीज के जैसी

तेरी मेहनत ने ही मधुकर मुझे फिर से उबारा है



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अलोक सिन्हा
28 फरवरी 2019

बहुत अच्छी गजल है |

शिशिर मधुकर
28 फरवरी 2019

तहे दिल से शुक्रिया आलोक जी ........

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मुझे तू प्यार करता है तो मैं सिमटी सी जाती हूँखुशी से झूम उठती हूँ लाज संग मुस्कुराती हूँमेरे मन में उमंगों का बड़ा सा ज्वार उठता हैमगर मैं हाले दिल तुमको नहीं खुलकर बताती हूँमेरे हर क़तरे क़तरे में तेरी छवियां समाई हैमगर न जाने क्यों मैं प्यार अपना न जताती हूँनज़र लग जाए न अपनी मुहब्बत को कभी जग की
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ना
जिसे तुम ज़िन्दगी में सबसे ज्यादा प्यार करते होझिझक को छोड़ कर पीछे उसे बाँहों में भरते होज़मीं का साथ पाकर ही शज़र पे रंग आता हैचुकाने को कर्ज थोड़ा फूल तुम उस पे झरते होतेरे सीने से लगने की तमन्ना दिल में रहती हैमेरी हर एक पीड़ा तुम बड़ी शिद्दत से हरते होमुझे उन राहों पे चलने से हरदम मान मिलता है
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नज़रें चुरा ली आपने देख कर ना जाने क्योंमन में हम बसते हैं तेरे बात अब ये माने क्यों जानते थे जब ज़माना ख़ुदगर्ज होता है बहुत चल पड़े तेरी मुहब्बत फिर यहाँ हम पाने क्यों कुछ हश्र देखा है बुरा चाहत का इतना दोस्तोंसोचते हैं ये ह
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जिसे तुम ज़िन्दगी में सबसे ज्यादा प्यार करते होझिझक को छोड़ कर पीछे उसे बाँहों में भरते होज़मीं का साथ पाकर ही शज़र पे रंग आता हैचुकाने को कर्ज थोड़ा फूल तुम उस पे झरते होतेरे सीने से लगने की तमन्ना दिल में रहती हैमेरी हर एक पीड़ा तुम बड़ी शिद्दत से हरते होमुझे उन राहों पे चलने से हरदम मान मिलता है
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