नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले

07 मार्च 2019   |  राकेश कुमार श्रीवास्तव   (26 बार पढ़ा जा चुका है)

#नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले#


नारी के हालात नहीं बदले,

हालात अभी, जैसे थे पहले,

द्रौपदी अहिल्या या हो सीता,

इन सब की चीत्कार तू सुन ले।


राम-कृष्ण अब ना आने वाले,

अपनी रक्षा अब खुद तू कर ले,

सतयुग, त्रेता, द्वापर युग बीता,

कलयुग में अपनी रूप बदल ले।


लक्ष्य कठिन है, फिर भी तू चुन ले,

मंजिल अपनी अब तू तय कर ले,

अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ,

अपना जीवन तू जी भर जी ले।


जो भी हैं अबला कहने वाले,

हक़ यूँ नहीं तुम्हें देने वाले,

उनसे क्या आशा रखना जिसने,

मुँह से छीन ली तेरे निवाले।


बेड़ियाँ हैं अब टूटने वाली,

मुक्ति-मार्ग सभी तेरे हवाले,

लक्ष्मी, इंदरा, कल्पना जैसी,

दम लगा कर हुंकार तू भर ले।


-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



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