सच कहूँ तो आज बाबा की मजबूरी सी हूँ

16 मार्च 2019   |  आयेशा मेहता   (33 बार पढ़ा जा चुका है)

सच कहूँ तो आज बाबा की मजबूरी सी हूँ  - शब्द (shabd.in)

आज फिर मैं बोझ सी लगी हूँ ,

यूँ तो मैं बाबा की गुड़िया रानी हूँ ,

पर सच कहाँ बदलता है झूठे दिल्लासों से ,

सच कहूँ तो आज बाबा की मजबूरी सी हूँ ा

उनके माथे की सिलवटें बता रही है ,

कितने चिंतित है मगर जताते नहीं है वो ,

अपनी गुड़िया को एक गुड्डा दिलाने के लिए ,

घनी दोपहरी में पाई - पाई जोड़ रहे है वो ा

मैं कैसे समझाऊँ बाबा को

खुशियाँ नहीं खरीदी जाती कीमतों से ,

जो खुद सरेआम बिक गया हो बाजार में ,

वो क्या समझेगा उनके बिटिया के जज्बात को ा

क्यों मेरी झूठी खुशियों के लिए ,

गैरों के सामने अपना हाथ फैलाते हो ,

आपने ही मुझे सिखाया सर उठा कर जीना ,

फिर आज क्यों अपनी पगड़ी किसी के पाँव में रखते हो

बाबा एक बात सुनो मेरी ,

मेरी खुशियाँ उस बिकाऊ गुड्डे में नहीं है ,

मेरी तो जान बाबा आप में बस्ती है ा

अगला लेख: शायरी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
18 मार्च 2019
शु
ऐ ! मेरे मधुमेह !तुमने दी मेरी ज़िन्दगी बदल, खाने, पीने और रहने में जब दी तुमने दख़ल । मैं जी रही थी बेख़बर ,स्वास्थ्य की थी न कदर। जब तुमने ताकीद दी, शुरू अपनी परवाह की ।जीने का आया कुछ सलीका, अपनाया योग का भी तरीका। अब खुद को भी देती समय, जीवन
18 मार्च 2019
12 मार्च 2019
मे
किसी ने उसे हिंदु बताया,किसी ने कहा वो मुसलमान था,खुद को मौत की सजा सुनाई जिसने,वो मेरे देश का किसान था।जिसकी उम्मीदाें से कहीं नीचा आसमान था,मुरझाकर भी उसका हौंसला बलवान था,जब वक्त ने भी हिम्मत और आस छोड़ दी,उस वक्त भी वो अपने हालातों का सुल्तान था।किस्मत उसकी हारी हुई बाजी का फरमान था,बिना मांस की
12 मार्च 2019
29 मार्च 2019
शा
लोगों ने कहा , बहुत किताबी बनती हो , हकीकत में जीना क्यों नहीं सीखती है ? उन्हें क्या पता , मुझ जैसों की कहानी से ही तो किताबें बनती है ा
29 मार्च 2019
29 मार्च 2019
जो मशवरा लोगों ने मुझे दिया , वही मशवरा मैं तुम्हे भी देती हूँ ...... मोहब्बत में क़ुरबत बहुत है , मोहब्बत करना छोड़ दो ,ये और बात है की मैं भी नहीं मानी थी , मगर तुम देख लो ा किसी ने मुझसे कहा ....... प्यार यूँ हीं नहीं होता ...
29 मार्च 2019
22 मार्च 2019
वि
कविताविज्ञापनविजय कुमार तिवारीजागते ही खोजती है अखबार,झुँझलाती है-कि जल्दी क्यों नहीं दे जाता अखबार। अखबार में खोजती है-नौकरियों के विज्ञापन। पतली-पतली अंगुलियों से,एक -एक शब्द को छूती हुई,हर पंक्ति पर दृष्टि जमाये,पहुँच जाती है अंतिम शब्द तक। गहरा निःश्वांस छोड़ती है
22 मार्च 2019
07 मार्च 2019
#नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले#नारी के हालात नहीं बदले,हालात अभी, जैसे थे पहले,द्रौपदी अहिल्या या हो सीता,इन सब की चीत्कार तू सुन ले। राम-कृष्ण अब ना आने वाले,अपनी रक्षा अब खुद तू कर ले,सतयुग, त्रेता, द्वापर युग बीता,कलयुग में अपनी रूप बदल ले।लक्ष्य कठिन है, फिर भी
07 मार्च 2019
31 मार्च 2019
ये वही जगह है जहाँ पहली दफा मैं उससे मिली थी , हर शाम की तरह उस शाम भी मैं अपनी तन्हाई यहाँ काटने आई थी ,मुझे समंदर से बातें करने की आदत थी ,और मैं अपनी हर एक बात लहरों को बताया करती थी ,अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे समंदर के उस पा
31 मार्च 2019
06 मार्च 2019
दोस्तों हम आपके लिए बेस्ट लाइन फॉर लाइफ इन हिंदी (best line for life in hindi) में लाए है और ये उम्मीद करते है कि ये कोट्स आपके जीवन में किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए प्रेरक के तौर पर काम करेगा। अक्सर कई
06 मार्च 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x